Friendship Day पर दो दोस्तों की प्रेम भरी कहानी दिल को छु गई

friendship story:दो दोस्तों की प्रेम भरी कहाँ दिल को छु गई

माता-पिता और और अन्य रिश्ते तो हमें स्वयं  मिलते हैं लेकिन दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो हम खुद बनाते हैं। आज happy friendship day 2020 और हर साल अगस्त के महीने के पहले रविवार को यह मनाया जाता है। एक अच्छा दोस्त वह नहीं  होता जो खाली अच्छे समय में आपका साथ दे बल्कि एक अच्छा दोस्त वह होता है जो अच्छे के साथ साथ बुरे समय में भी आपका साथ दे एक दोस्त ही वह होता है जिसे हम अपनी सारी बातें कह सकते हैं।

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Friendship story :मित्रता की कहानी: friendship day story in hindi

 

friendship day story
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आज हम मित्रता से जुड़ी हुई एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं। यह दो लोगों की कहानी है जो कि आपस में घनिष्ठ मित्र थे और आइए देखते हैं, वह दोनों कैसे अलग हुए  और कैसे फ़िर से  एक मित्र बनेगांव में दो मित्र थे। रमेश और सुरेश इनकी मित्रता इतनी गहरी  थी कि लोग इनकी मित्रता की मिसाल दिया करते और इनकी मित्रता की गाँव में खूब चर्चाएँ होती थी.रमेश जहां बढ़ई कारपेंटर का काम करते थे वहीं सुरेश एक  किसान थे और खेती का काम करते थे। दोनों हर समय एक दूसरे की सहायता करते रहते और हर बुरे वक्त में एक दूसरे का साथ देते रहते। धीरे-धीरे समय बीतता गया.एक दिन रमेश और उसकी मां का झगड़ा हो गया और झगड़ा इतना बढ़ गया कि रमेश की मां ने पंचायत में शरण ली क्योंकि रमेश ने अपनी मां को बाहर निकाल दिया था। उस समय सारे पैसे पंचायत में ही होते थे तो रमेश की मां ने आरोप लगाया कि रमेश मुझे हर समय सुनाता  रहता है कि मैं तुम्हें खाना खिलाता हूं।

 

तुम्हारे लिए सब कुछ करता हूं और यह कह कर आज रमेश ने मुझे निकाल दिया।जबकि रमेश ने कहा कि यह झूठ बोल रही है मैने ऐसा कुछ भी नहीं किया. तो पंचायत ने उन दोनों रमेश और उसकी माँ को एक सरपंच चुनने को कहा. रमेश जानता था कि पूरे गाँव में उसके खिलाफ कोई आवाज़ नहीं उठा सकता तो उसने अपनी माँ से कहा तुम ही अपनी पसंद का सरपंच चुन लो. तो उसकी माँ ने रमेश के दोस्त सुरेश को ही सरपंच के लिये चुना क्योंकि रमेश की माँ जानती थी कि सुरेश भले ही रमेश के दोस्त हो लेकिन फ़ैसला हमेशा न्याय का ही करते  हैं और हुआ भी ऐसा ही सुरेश ने रमेश की माँ के हित में ही फैसला सुनाया और रमेश से कहा कि तुमने अपनी माँ के साथ अन्याय किया है तुम्हें इसका हर्जाना भरना होगा और आईन्दा से अपनी माँ का हमेशा ख्याल रखोगे.इस फ़ैसले से रमेश ने सुरेश से दोस्ती तोड़ दी और सुरेश को सबक सिखाने का अवसर ढूँढ़ने लगा .

धीरे धीरे समय बीतता गया एक बार सुरेश अपने बैलों को जंगल में चरा रहा था और सुरेश का एक बैल पहाड़ी से नीचे खाई में गिर गया और मर गया जिस कारण सुरेश के पास एक ही बैल बच गया और उसने उस बैल को बेचने का सोचा.एक व्यापारी वह बैल खरीदने आया उसने सुरेश से कहा कि मुझे अपना सामान ढोने ने लिए इसकी ज़रूरत है. तो सुरेश ने उसे वह बैल बेच दिया और व्यापारी ने सुरेश के कहा कि वह एक महीने के बाद इसके पैसे उसे दे देगा. इसके बाद वह व्यापारी उस बैल की पीठ में काफ़ी ज़्यादा सामान रखता और उससे काफ़ी काम करवाता और खाना भी कम देता. इसी कारण वह बैल एक दिन मर गया.इसके बाद जब सुरेश ने उस व्यापारी से बैल के पैसे देने के लिये कहा तो व्यापारी ने कहा काहे के पैसे तुम्हारा बैल तो मर गया इस पर सुरेश और उस व्यापारी की लड़ाई हो गयी. लोगों ने देखा तो उन्हें पंचायत में जाने की सलाह दी. दोनों पंचायत में गये. जब उनसे सरपंच चुनने को कहा तो उस व्यापारी ने रमेश को सरपंच के लिये चुना.

जिससे सुरेश हक्के बक्के रह गये क्योंकि वह जानते थे कि रमेश अब उनके खिलाफ ही फैसला सुनाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं रमेश ने सुरेश के हक में ही फैसला सुनाया और व्यापारी से बैल के पूरे पैसे अदा करने को कहा. क्योंकि रमेश पहले तो सोच रहे था  कि सुरेश के खिलाफ ही फैसला सुनाऐंगे लेकिन जब वह सरपंच की गद्दी पर बैठे उन्हें अपने बदले से ज्यादा न्याय की चिन्ता हो गयी और उन्होंने सुरेश के हक में फैसला सुनाया. और रमेश और सुरेश फ़िर से एक घनिष्ठ मित्र बन गए.

दोस्तों कहते है न अगर सही दोस्तों का साथ हमें मिल जाये तो हर काम संभव हो सकता है आप सभी साथियो को happy friendship day और कैसी लगी यह story कमेंट करना न भूले .

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