भारत का सबसे प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर की रहस्यमई कहानी

भारत में अनेकों ऐसे मंदिर ओर धार्मिक स्थल है जो कि अपने आप में काफी प्रसिद्ध हैं. लाखों भक्त इन मंदिरों में हर साल माथा टेकने आते हैं. ऐसा ही एक मंदिर है जम्मू कश्मीर का वैष्णो देवी मंदिर जम्मू से करीब 62 किलोमीटर की दूरी पर कटरा के समीप त्रिकुटा की पहाड़ियों पर यह मंदिर स्थित है.यह साल देश विदेश से लाखों भक्त वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं और माता रानी की पूजा अर्चना करते हैं और माता रानी भी अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं.वैष्णो देवी का मंदिर किस राज्य में है?

माँ वैष्णो देवी मंदिर के बारे में जानकारी

भारत का यह सबसे प्रसिद्ध वैष्णो देवी का मंदिर जम्मू से 62 किलोमीटर की दूरी पर कटरा के समीप त्रिकुटा श्रृंखला की पहाड़ियों पर है.अगर आप दिल्ली से आते हैं तो दिल्ली से कटरा की दूरी करीब 650 किलोमीटर है.कटरा तक सभी परिवहन साधनों रेल, बस और हवाई जहाज से भी पहुंचा जा सकता है.कटरा से ही 14 किलोमीटर की चढ़ाई पर स्थित है वैष्णो देवी का मंदिर और यहीं से तीन किलोमीटर की दूरी पर है भैरवनाथ का मंदिर.कटरा से वैसे तो ज्यादातर लोग पैदल ही वैष्णो माता के दर्शन के लिए जाते हैं.लेकिन अगर आप जाने में सक्षम नहीं है तो यहां जाने के लिए खच्चर पालकी और बैटरी कार की व्यवस्था भी की गई है.कटरा से वैष्णो देवी मंदिर तक कई जगहों पर जलपान और नाश्ते की व्यवस्था भी की गई है.यहां आप चाय या कॉफी पीकर भी अपनी थकान मिटा सकते हैं.साथ ही वैष्णो माता के रास्ते का प्राकृतिक सौंदर्य से सामने आपको थकान की याद नहीं आएगी.वैष्णो माता मंदिर तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद भारत का दूसरा सबसे ज्यादा देखा जाने वाला धार्मिक मंदिर है .

वैष्णो देवी मंदिर की कहानी 

हिन्दू महाकाव्य के अनुसार वैष्णो देवी का जन्म दक्षिण भारत में रत्नाकर सागर के यहां एक बालिका के रूप में हुआ था.इन्हें बचपन में त्रिकुटा के नाम से जाना जाता था.त्रिकुटा भगवान राम को पति के रूप में पाने के लिए दक्षिण भारत में समुद्र के किनारे तप करने लगी.जब भगवान राम सीता की खोज में यहां पर आए तो उन्होंने यहां मां वैष्णो देवी को तप करते हुए देखा.जिसके बाद वैष्णो देवी ने कहा कि मैं आपको पति रूप में पाने के लिए ही तप कर रही हूं.जिस पर भगवान राम ने कहा ” मैंने सीता से विवाह कर लिया है इस जन्म में तो में तुमसे विवाह नहीं कर सकता लेकिन कलियुग में जब मेरा कल्कि अवतार होगा तब में तुम्हारे साथ विवाह करूंगा ” ऐसा कहकर भगवान राम ने वैष्णो देवी को उत्तर भारत में त्रिकुटा श्रृंखला में तपस्या के लिए भेज दिया.

वैष्णो देवी मंदिर की कहानी -2

वैष्णो देवी के एक सच्चे भक्त थे श्रीधर.जो कटरा से 2 किलोमीटर की दूरी पर हंसली गांव में रहते थे.एक रात सपने में मां वैष्णो देवी ने श्रीधर को दर्शन दिए और कहा कि तुम एक भंडारे का आयोजन करो और सबको भोजन कराओ.जिस पर श्रीधर ने कहा कि मेरे पास तो मेरे खाने के लिए भी अनाज नहीं है मैं सबको भोजन कैसे कराऊंगा ना ही मेरे पास इतनी जगह भी नहीं है जिसमें में सभी गांव वालों को ठहरा सकूं.जिस पर वैष्णो देवी ने कहा उसकी चिंता तुम मत करो.तुम बस भंडारे का आयोजन करो.इस भंडारे में वैष्णो माता ने भेरवनाथ को भी बुलाने को कहा. भेरवनाथ एक बहुत ही ताकतवर राक्षस था.जो अपने आप को ही भगवान मानता था और सबको अपनी पूजा करने के लिए कहता था.उसका यह घमंड चूर करने के लिए ही वैष्णो देवी ने उसे भंडार का आमंत्रण दिया.
श्रीधर ने ऐसा ही किया सभी को भंडारे का आमंत्रण दिलाया.श्रीधर की एक छोटी सी कुटिया थी जिसमें वह निवास करता था.जब सभी भक्त और भैरवनाथ आ गए तो उनके बैठने के लिए जगह कम पड़ने लगी.जिस पर भैरवनाथ ने कहा भंडारे का आयोजन तो कर दिया लेकिन बैठेंगे कहां
श्रीधर ने कहा माता रानी ने कहा है वो आयंगी और सब संभाल लेंगी.कहा जाता है कि जब सब कुटिया में गए तो कुटिया खुद-ब-खुद बड़ी हो गई और सबके बैठने के लिए पर्याप्त जगह हो गई.कुछ देर बाद श्रीधर ने देखा कि एक छोटी सी कन्या सबको भोजन परोस रही है.श्रीधर समझ गए कि यही वैष्णो देवी हैं.इस प्रकार मां वैष्णो देवी ने न सिर्फ अपने भक्त श्रीधर की लाज रखी बल्कि भैरवनाथ के घमंड को भी चूर चूर कर दिया.
मां वैष्णो देवी जब त्रिकुटा पर तपस्या कर रही थी तो भैरवनाथ वहां बार बार आ जाता और वैष्णो देवी को युद्ध के लिए ललकारता और फिर हारकर भाग जाता जिससे माता की तपस्या भंग हो जा रही थी तो मां वैष्णो देवी ने पवनपुत्र हनुमान को पहरे के लिए रख लिया.एक बार हनुमान जी को प्यास लगी तो वैष्णो देवी ने अपने धनुष से एक बाण पहाड़ पर चलाया और वहां से मां गंगा की जलधारा बहने लगी और हनुमान जी ने उससे अपनी प्यास भूजाई और इसे ही बाणगंगा के नाम से जाना जाता है.
कहते हैं कि हनुमान और भैरवनाथ का युद्ध 9महीने तक चला था. नौ महीने बाद जब वैष्णो देवी तपस्या से आई तो उन्होंने बाहर आकार भैरवनाथ का वध किया.
कहा जाता है कि भैरवनाथ को पता था कि वह कन्या माता रानी का ही रूप थी और मोक्ष प्राप्ति के लिए वह वैष्णो देवी के हाथों मरना चाहता था.वध के बाद वैष्णो देवी ने कहा कि मेरे ही साथ-साथ तुम्हारी भी पूजा की जाएगी तुम्हारी पूजा के बिना मेरी पूजा भी अधूरी मानी जाएगी
इसी कारण जो भी वैष्णो माता के मंदिर आते हैं इसी के पास स्थित भैरवनाथ मंदिर की पूजा भी अवश्य करते हैं.

माता वैष्णो देवी मंदिर के बारे में क्या जाना 

दोस्तों आज हमने जाना भारत का प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर की कहानी और माता वैष्णो देवी के चमत्कारी शक्तियों के बारे में माता रानी की कृपा आप सभी भक्तो पर बनी रहे.

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