Shivaram Rajguru Jayanti 2020|महान क्रांतिकारी शिवराम राजगुरु जी का जीवन परिचय

हमें आज़ादी दिलाने के लिए भारत के कई वीर सपूतों को अपनी जान की कुर्बानी देनी पड़ी इन्हीं में से एक थे Shivaram Rajguru . राजगुरु जी को 23 मार्च 1931 को भगत सिंह और सुखदेव जी के साथ सान्डर्स की हत्या के जुर्म में फाँसी के तख़्त पर लटका दिया था. इस दिन भारत ने अपने तीन महान सपूतों को खोया था.आज राजगुरु जी की जयंती है तो आईये आज उनके बारे में जानते हैं

राजगुरु जी का जन्म

राजगुरु जी जिनका पूरा नाम शिव राम हरि राजगुरु था का जन्म 24 अगस्त 1908 को पूणे महाराष्ट्र के ही एक खेड़ा गाँव में हुआ था. इनके पीता का नाम हरि नारायण तथा माता का नाम पार्वती बाई था.

राजगुरु जी का बचपन के दिन

राजगुरु जी जब केवल 6 वर्ष के थे तब ही उनके पिता का देहान्त हो गया था. जिस कारण इनका पालन पोषण इनकी माँ पार्वती बाई और इनके बड़े भाई के सानिध्य में हुआ. इन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई गाँव के ही स्कूल में की उसके बाद ये वाराणसी चले गए. यहां इन्होंने संस्कृत भाषा और वेदों का गहन अध्ध्यन किया. बहुत ही कम समय में ये इन्हें वेदिक साहित्य का काफ़ी ज्ञान हो गया था. लघु सिद्धांत कौमुदी जो कि बहुत ही कठिन ग्रंथ है. इसे भी बहुत कम समय में कंठस्थ कर लिया था.

उस समय भारत में आज़ादी की तैयारी चल रही थी. वाराणसी में ही इनकी मुलाकात अनेक क्रांतिकारियों से हुई. ये महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद जी से काफ़ी ज़्यादा प्रभावित हुए इनके कहने पर ही 1924 में इन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी को जोईन कर लिया था वहाँ इन्हें रघुनाथ के नाम से जाना जाता था.

लाला लाजपत राय जी की मृत्यु से हुए थे दुखी

जब भारत की संवैधानिक नीतियों को सुधारने के लिए 1928 में साईमन कमीशन भारत आया था. तो इसका भारत में पूर्ण रूप से विरोध किया गया क्योंकि इसमें एक भी सदस्य भारतीय नहीं था सारे ब्रिटिशर्स थे इस कारण इसका जमकर विरोध किया गया. इस विद्रोह का नेतृत्व लाला राजपत राय जी कर रहे थे. इस विद्रोह में पुलिस ने सभी क्रांतिकारियों पर लाठी चार्ज कर दिया जिसमें लाला राजपत राय जी की मृत्यु हो गयी.इससे राजगुरु जी और अन्य क्रांतिकारियों को गहरी चोट पहुँची थी.

लाला राजपत राय जी ही हत्या का बदला लेने का लिया था संकल्प

rajguru,bhagat singh,sukhdev
महान क्रांतिकारी सुखदेव  ,और भगत सिंह साथी राजगुरु

इसके बाद इन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव जी के साथ मिलकर अंग्रेज अफ़सर जेम्स ए स्कॉट को मारने का प्लेन बनाया क्योंकि इसके ही कहने पर राजपत राय जी पर लाठी चार्ज किया गया था. स्कॉट को मारने के लिए इन्होंने 17 दिसंबर 1928 का दिन चुना.इस दिन इन्होंने जब स्कॉट की गाड़ी जा रही थी उस पर स्कॉट है ये समझकर उस पर गोलियाँ चला दी. लेकिन उसमें सान्डर्स बैठा हुआ था और उसकी वहीं मृत्यु हो गयी. इसके बाद इन तीनों को पकड़ लिया गया और 31 मार्च 1931 को केवल 22 वर्ष की उम्र में राजगुरु जी और उनके साथियों को फाँसी दे दी गई. इन दिन हमने अपने तीन महान क्रांतिकारियों को खो दिया.

नमन है इन्हें लड़े वीरों की तरह जब खून फ़ौलाद हुआ
मरते दम तक डटे रहे तभी तो देश आज़ाद हुआ

यह भी पड़े –

तीलू रौतेली की कहानी उत्तराखंड की महान वीरांगना-जन्मदिन विशेष

सच में ऐसे वीर सपूतो को शत-शत नमन है Shivaram Rajguru  अमर रहे .आज shivaram rajguru jayanti भी है दोस्तों कैसा लगा आपको उनके बारे में जानकर हमें जरुर बताये और शेयर भी करे

रंगीलो पहाड़ व्हाट्सप्प ग्रुप जुड़ने के लिए क्लिक करे – rangilopahad

Leave a Reply