शादी एक सफ़र-में चल पढ़ा शादी के सफ़र में फिर जो हुआ आगे की कहानी

में यानि आप-मुझे लिखने का शौक तो बहुत है लेकिन लिखने की आदत नहीं है फिर भी कोशिश करता.लेखक व होता जो अपने दिल की गहराई से बाते व्यक्त करके अपनी कला को निखरता है जिसके एक-एक शब्द बहुत कुछ सिखा देते है.आपके लिए लेकर आया हु एक बार फिर से मजेदार कहानी-शादी एक सफ़र में चल पढ़ा शादी के सफ़र में .

शादी एक सफ़र 

बात कुछ दिनों की पहले की है.मेरे बुआ की लडकी की शादी थी और मुझे शादी के लिए जाना  था.शादी के पहले में उनके गाँव की ओर जाने लगा शाम का समय था और ठंडा मौसम और हल्की हवा बादल गरजने का संकेत दे रही थी.रास्ते में पड़ने वाला जंगल बहुत घना –चीड,बाँज,बुराश, देवदारों के पेड़ो से घिरा हुआ और मौसम सुहाना,शांत वातावरण मुझे मस्त मगन कर रही थी. में प्रक्रति के उस नज़ारे को महसूस कर रहा था जिसे हम जन्नत कहते है.रास्ते की ओर में आगे बड़ा में हिमालय पर्वत के दिव्य दर्शन होने लगे और मेने चारो ओर अपनी आखे घुमाई मुझे ऐसा व्यतीत होने लगा यही स्वर्ग है.स्वर्ग की परिभाषा क्या हो सकती है –मोक्ष की प्राप्ति मिले यानी सुख,सुकून,प्रकति का सौन्दर्य,शांति आखिर यही तो स्वर्ग है.हर कोई यही तो पाना चाहता है|

मेने अपनी आखे बंद की और प्रकति के इस नज़ारे देखने लगा महसूस करने लगा धीरे-धीरे मुझे उन पेड़ो,जंगलो की खुशबू आने लगी ऐसा लगा आपस में बाते कर रहे है.सच में अतभुत शंक्ति है.आप भी जरुर ऐसा कर सकते है.आगे की ओर बड़ा मुझे रास्ता समझ में नहीं आ रहा में भटक सा गया और कुछ समय बाद में सही रास्ते में आ गया कहते है ना- मुश्किले हर काम में आती है हमें उनका सामना करना चाहिए और उनसे आगे बढ़ जाना चाहिए|

आखिर बुआ का घर आ गया सामने महिला संगीत चल रही थी और डांस- गाने बज रहे थे अन्दर से अलग ही मजा आने लगा.सभी से मिला हाल चाल पूछने लगा धीरे-धीरे सूरज ढलने लगा सब लोग खाना-खाने लगे .में भी खाना खाने चले गया आगे सभी लोग पहाड़ी गानों में डांस कर रहे थे.कहते है ना-मनोरंजन एक ऐसा साधन से जो हर इन्सान को अपनी ओर आकर्षित कर देता है में भी दोस्तों के साथ डांस करने लगा और फिर रुका नहीं करीब 1 बजे तक हमने डांस किया.फिर सोने लगा-कहा आती है दूसरो के वहा नीद यह अधिकतर सबका कहना होता है.

सुबह के 4 बजे में उठ गया फ्रेश होकर में रसोई में चले गया और वहा चाय पिने लगा सच में इंसानों का चाय के साथ अटूट प्रेम है.सुबह की अदरक की बनी चाय और बारात के लिए खाना तैयार होने वाला ही था-सब्जी,पनीर ,चावल दाल,सलाद आदि व्यंजन बनने लगे.धीरे- धीरे समय निकले लग गया और बारात का आने का समय होने लगा.

मुझे एक अलग ही ख़ुशी होने लगी और मेने देखा बारात के लिए पहले चाय-पानी की तैयार करते है बारात घर से थोडा आगे उसके बाद बारात का स्वागत किया जाता है परंपरा के अनुसार और होने लगा डांस,चोलिया डांस पहाड़ की शान और आगे का कार्यक्रम चालू होने लगा बर-ब्योली(दूल्हा-दुल्हन) का मिलाप जयमाला,आशीर्वाद देना,शादी के फेरे आदि होने लगे.आगे बारात विदाई का समय हुआ सभी के आख-आशुओ से भरे देखकर मेरी भी आख भर आई.दुल्हन को डोली में बिठाकर विदाई हमने गाड़ी तक पंहुचा दिया और बारात चले गई.एक शादी-विवाह संपन्न हो गया.

शादी एक सफ़र
शादी एक सफ़र

शादी एक सफ़रमेरे चल पड़ा शादी के सफ़र में आपको कैसी लगी कहानी अच्छी या बोरिंग जरुर बताये में सुधार की कोशिस जरुर करूँगा जय देवभूमि उत्तराखंड.

 

 

 

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