नैनीताल जिले के 5 सबसे आकर्षित पर्यटन स्थल जहा हर कोई जाना पसंद करता है

जैसे उत्तराखंड राज्य अपनी विशिष्ट पहचान के कारण पूरे भारत भर में प्रसिद्ध है.वैसे ही उत्तराखंड का हर एक जिला हर एक शहर अपनी अलग ही पहचान दिखाता है.इन्हीं में से एक जिला है नैनीताल जिला कुमाऊं मंडल का यह जिला यहां स्थित झीलों के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है.इसी कारण तो Nainital को झीलों की नगरी या सरोवर नगरी कहा जाता है.विश्व पर्यटन के मानचित्र पर भी नैनीताल एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहां सर्वाधिक झीलें हैं. ऐसा भी कहा जाता है कि एक समय पर यहां से भी ज्यादा झीलें थीं .Weather in Nainital -गर्मियों के मौसम में यहां ठंड का वातावरण सैलानियों को खूब लुभाता है.इसलिए तो देश विदेश से हर वर्ष लाखों  की संख्या में दर्शक यहां आते हैं यहां नौकायन करते हैं,यहां की झीलों और यहां की खूबसूरती का आनंद उठाते हैं |चलिए शुरू करते नैनीताल की यात्रा .

नैनीताल जिला कहा है

नैनीताल शहर तीनों ओर से चायनापीक(नैना पीक),टिफिन टॉप शेर का डंडा, स्नोव्यू, हाडी़ गड़ी, लड़िया कांटा आदि ऊंची ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है.समुद्र तल से करीब 1980 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह जिला कुमाऊं के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां से टैक्सी और बसें निरंतर चलती रहती हैं.जिनसे आसानी से नैनीताल पहुंचा जा सकता है और यहां घूमने और यहां के मनोरम वातावरण का आनंद लिया जा सकता है |

नैनताल का सुन्दर नजारा
                                                            नैनताल का सुन्दर नजारा

नैनीताल से  पंतनगर हवाई अड्डे की दूरी 71 किलोमीटर है और यह नैनीताल के आस पास का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है.

नैनीताल शहर किस राज्य में पड़ता है ?

1882 में काठगोदाम तक रेलवे लाइन बनने और 1891 में जिला मुख्यालय बनने के बाद अंग्रजों ने इस स्थान कि खूबसूरती को सराहा और इस क्षेत्र का विकास किया.1900 में यहां राजभवन या सचिवालय भवन का निर्माण किया गया और 1962 से इसे उत्तर प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में उपयोग किया जाने लगा.9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय को भी नैनीताल में शिफ्ट किया गया |

नैनीताल के पर्यटन स्थल(Nainital tourist places)

नैनीताल में क्या-क्या घूमने लायक है?नैनीताल ट्रिप

नैनीताल झील -Nainital Lake

नैनीताल झील
                                              नैनीताल झील

आज आपको में आपको बताने वाला हु की – नैनीताल में क्या-क्या घूमने लायक है? 

नैनीताल शहर के बीच में एक झील है जो कि नैनीताल का मुख्य आकर्षण स्थल है जिसे नैनी झील के नाम से जाना जाता है जो कि सात पहाड़ियों से घिरी हुई है.इस झील की  लंबाई 1500 मीटर , चौड़ाई 510 मीटर तथा गहराई 10 से 156 मीटर है.इस ताल के दोनों तरफ सड़क बनी हुई है. नैनी झील के ऊपरी भाग को मल्ली ताल तथा निचले भाग को तल्ली ताल के नाम से भी जाना जाता है.इस झील के आस पास अन्य झीलें भी हैं  जिन्हें छखाता के नाम से जाना जाता है.

नैनी झील की कहानी 

एक बार तीन ऋषि अत्रि, पुलस्त्य ऋषि और पुलह ऋषि नैनीताल के इस खूबसूरत स्थान पर आए. लेकिन यहां उन्हें पानी नहीं मिला तो उन्होंने इस स्थान पर गढ्ढा खोदकर एक झील का निर्माण किया और मानसरोवर झील का पवित्र जल इस झील  में डाल दिया.इसी को हम आज नैनी झील के नाम से जानते हैं.तीन ऋषियों के द्वारा निर्मित होने के कारण नैनी झील को त्री ऋषि सरोवर भी कहा जाता है. इसी कारण इस झील के बारे में यह भी कहा जाता है कि जितना पुण्य मानसरोवर झील में डुबकी लगाने से मिलता है उतना ही पुण्य नैनीताल की नैनी झील m डुबकी लगाने से भी मिलता है.जो भी पर्यटक यहां आता है वो इस झील में नौकायन का आनंद जरूर लेता है.

नैना देवी मंदिर

नैना देवी मंदिर
                                                                                    नैना देवी मंदिर

नैनी झील के किनारे जी मल्ली ताल के पास मां नैना देवी का एक भव्य मंदिर भी स्थित है.1880 में हुए भीषण भूस्खलन के कारण यह मंदिर नष्ट ही गया था.इसके बाद 1882 में इसकी दबी मूर्ति को निकालकर इसका पुनर्निर्माण किया गया.

नैना देवी मंदिर की कहानी  

जब देवी सती भगवान शिव के अपमान के कारण अग्नि में कूद गई.जिसके बाद भगवान शिव देवी सती के शव को कैलाश के जाने लगे.कहा जाता है कि इस स्थान पर देवी सती की आंखें गिरी थीं.इसी कारण यह देवी के शक्तिपीठों में भी गिना जाता है.

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान 

Jim corbett to nainital -कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का निर्माण  हैली राष्ट्रीय उद्यान के नाम से 1936 में किया गया.भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क भी जिम कार्बेट ही है.स्वतंत्रता के बाद इसका नाम बदल कर रामगंगा नेशनल पार्क रखा गया.1957 में इसका नाम बदल कर जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान रखा गया.क्योंकि जिम कार्बेट जी ने इस उद्यान के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.यह पार्क दो जिलों पौढ़ी गढ़वाल (312.76 वर्ग किलोमीटर) और नैनीताल (208.8वर्ग किलोमीटर) में फैला हुआ है इसका प्रवेश द्वार रामनगर के निकट ढिकाला (नैनीताल) में है.इस पार्क में लगभग 570 पक्षी प्रजातिया,लगभग 75 स्तनधारी जीव और 25 सरीसृप प्रजातियां पाई जाती हैं. महशीर, हिरन,बाघ,हाथी,तेंदुआ,कांकड़,सांभर,अजगर,मगरमच्छ आदि यहां के प्रमुख जीव हैं.पशु प्रेमी और वन्य जीव प्रेमी लोगों को यह स्थान काफी लुभाता है

जिम कार्बेट कौन थे

जिम कार्बेट ना सिर्फ एक शिकारी थे बल्कि वह एक दार्शनिक और लेखक भी थे.जिम कार्बेट का जन्म 18 जुलाई 1875 को हुआ था.इनका आवास नैनीताल के कालाढूंगी में था.ये आयरिश मूल के थे.गढ़वाल के लोगों को आदमखोर बाघों के आतंक से मुक्ति दिलाने का श्रेय जिम कार्बेट को ही जाता है.चंपावत में 436 लोगों को मारने वाले आदमखोर बाघ से भी जिम कार्बेट ने है मुक्ति दिलाई थी.

नैना पीक चोटी 

इसे चायना पीक के नाम से भी जाना जाता है.2611 मीटर ऊंची यह चोटी नैनीताल की सबसे ऊंची चोटी है जो कि नैनीताल शहर से 5.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.हिमालय की मनोरम छटा के दर्शन भी इस चोटी से किए जाते हैं.

स्नो व्यू -Nainital Snowfall

इस शिखर की ऊंचाई 2270 मीटर है यह नैनीताल की दूसरी  सबसे ऊंची चोटी है यहां जाने के लिए रोपवे मार्ग बना हुआ है.इस चोटी से भी हिमालय के मनोहारी दृश्य देखने लायक होते हैं.

तो ये थी कुछ नैनीताल की घूमने लायक जगहें इसके अलावा भी नैनीताल में कई झीलें और कई और पर्वत चोटियां जैसे खुरपाताल, किलबरी,देवापाटा , लड़ीया कांटा,शेर का डांडा आदि हैं. जो कि नैनीताल के मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं.

नैनीताल के बारे में क्या सिखा 

यहाँ उत्तराखंड का सबसे खुबसूरत स्थल है और लोकप्रिय है हर साल लाखो पर्यटक घुमने आते है हमने नैनीताल जिला के बारे में पूरी जानकारी पढ़ ली है आपके कोई सवाल है हमें पूछ सकते है धन्यवाद .

रानीखेत के 5 सबसे आकर्षित स्थान 

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