विश्व मानवाधिकार दिवस 2020 पर मानवाधिकारों को पहचानिए

इंसान के अधिकारों को सुरक्षित करने गरीब पर हो रहे अत्याचारों को रोकने और उसे समान अवसर देने में मानवाधिकारों का ही योगदान होता है.मानवाधिकारों के बिना हमारा वजूद भी लगभग ना के बराबर है.
मानवाधिकार दिवस कब मनाया जाता है (Human rights day) विश्व मानवाधिकार दिवस हर वर्ष 10 दिसंबर को मनाया जाता है. मानवाधिकार कब लागू हुआ? -इसकी शुरुआत यूनाइटेड नेशन ने 1948 में की थी और आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा 1950 में हुई थी.तब से हर वर्ष 10 दिसंबर को ही Manavadhikar Diwas मनाया जाता है.

Manavdhikar से क्या तात्पर्य है?

मानवाधिकारों का मतलब मानव को मिलने वाले उन मौलिक अधिकारों से है जिसके हकदार सभी लोग हैं
मानवाधिकार वो अधिकार हैं जो एक इंसान को अपने हिसाब से जीने और उसे आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं.मनुष्य के आर्थिक सामाजिक जीवन में उन्नति करने के लिए मानवाधिकारों का काफी महत्व होता है.मानवाधिकार वो मूलभूत अधिकार हैं जिनसे किसी को भी उसके जाति,लिंग धर्म के आधार पर उसे प्रताड़ित नहीं किया जा सकता और अन्य सभी की तरह उसे भी आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं.मनुष्य के बहुमुखी विकास में लिए मूल अधिकार काफी महत्व रखते हैं.

मानवाधिकार की शुरुआत

वैसे तो कई प्राचीन अभिलेखों,पुस्तकों , ग्रंथों में मानवाधिकारों की बात कही गई है.जैसे -अशोक के आदेश पत्र,messak-e-madeena आदि.लेकिन आधुनिक मानवाधिकार की शुरुआत 1525 से हुई.
द ट्वेल्व आर्टिकल्स ऑफ द ब्लैक फॉरेस्ट को मानवाधिकारों से संबंधित प्रथम दस्तावेज माना जाता है.इसके बाद 1628 में यूनाइटेड किंगडम ने पेटिशन और राइट्स में मानवाधिकारों का उल्लेख किया.1690 में जॉन लॉक ने भी अपनी पुस्तक स्टेट्स ऑफ नेचर में मानवाधिकारों का वर्णन किया.ब्रिटिश बिल ऑफ राइट्स ने 1791 में यूनाइटेड किंगडम में सरकारी दमनकारी नीतियों को अवैध करार दिया.1776 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने मानवाधिकारों को अपने संविधान में जगह दी.इसके बाद 1789 में फ्रांस में नागरिकों के अधिकारों का अधिग्रहण किया गया. इन दोनों क्रांतियों से ही मानवाधिकारों को संविधान में जगह मिली.

भारत में मानवाधिकार

1948 में जब विश्व युद्ध समाप्त हुआ तो विश्व के 48 देशों ने संयुक्त रूप से एक चार्टर पर हस्ताक्षर किए.जिसमें मानवाधिकारों की रक्षा करने की बात की गई थी.लेकिन भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन 1993 में किया गया
भारत के संविधान में अनुच्छेद 12 से 35 तक मूल अधिकारों से संबंधित बात कही गई है.प्रारंभ में मूल अधिकारों की संख्या सात थी.मगर 44वें संविधान संशोधन 1978 के द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर विधिक अधिकार बनाया गया.
अनुच्छेद 12 इसमें राज्य की परिभाषा दी गई है.कहा गया है कि राज्य संसद,लोकसभा राज्यसभा,राष्ट्रपति,कार्यपालिका,विधायिका से मिलकर बना होता है.अगर राज्य मूल अधिकारों का हनन करता है तो उसे चुनौती दी जा सकती है यह बात भी इसमें कही गई है.
अनुच्छेद 13 ऐसा कोई भी कानून जिससे मूल अधिकारों का हनन होता है उसे शून्य घोषित कर दिया जाएगा
अनुच्छेद 14 कोई भी व्यक्ति विधि के समक्ष समान होगा
अनुच्छेद 15 धर्म ,जाति ,लिंग,वंश किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं किया जायेगा
अनुच्छेद 16 राज्य के अधीन सरकारी पदों पर चयन के समान अवसर मिलेंगे
SC,ST,OBC,EWS ki आरक्षण
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत
सार्वजनिक मंदिरों में जाने के लिए धर्म जाति या वंश के आधार पर कोई रोक नहीं होगी
मनोरंजन स्थलों ,होटलों ,अस्पताल , विद्यालय में भेदभाव नहीं होगा
SC जाति के संबंधित किसी भी व्यक्ति का अपमान करना कानून के खिलाफ होगा
अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत
राज्य सेना और शिक्षा संबंधी सम्मान के अलावा कोई भी उपाधि प्रदान नहीं करेगा
अनुच्छेद 19 बोलने की आजादी
कहीं पर भी अपनी बात को रखने और अपने विचारों की प्रकट करने की स्वतंत्रता होगी
अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण
अनुच्छेद 21 प्राण एवम् दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 21 क प्रारम्भिक शिक्षा का अधिकार
अनुच्छेद 22 कुछ दशाओं में गिरफ्तारी के विरोध में संरक्षण के लिए
अनुच्छेद 23 मानव के दुर्व्यापार से संबंधित एवम् बाल श्रम का निषेध
अनुच्छेद 24 कारखानों आदि में बाल श्रम का निषेध
अनुच्छेद 25 अतः करण की किसी भी धर्म को मानने ,उसके आचरण और प्रचार प्रसार करने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 26 धार्मिक कार्यों के प्रबंध करने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 27 धर्म की वृद्धि के लिए करों में छूट की व्यवस्था
अनुच्छेद 28 राज्य पोषित संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी
अनुच्छेद 29 संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार
अपनी भाषा व बोली को संरक्षित करने का अधिकार होगा और अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण किया जायेगा
अनुच्छेद 30 अल्पसंखयक वर्गों को उनकी संस्थानों की स्थापना और उन पर शासन करने का अधिकार होगा
अनुच्छेद 31 निरसित है
अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचार का अधिकार
क्या नया सिखा
तो यह हैं भारत के संविधान में दिए हुए मूल अधिकार.आज हमने जाना मानवाधिकार क्या है ,मानवाधिकारों की शुरुआत कैसे हुई ,मानवाधिकारों का क्या महत्व है.Manavadhikar diwas कब मनाया जाता है .

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