मकर संक्रांति क्यों मनाते है और महत्व क्या है अनोखी जानकारी

नमस्कार सभी पाठको की में स्वागत करता हु आज के लाजवाब बातो पर आज हम बार करके वाले है पुरे भारत वर्ष में मनाया जाने वाला प्रसिद्ध त्यौहार Makar Sankranti 2021 के बारे में आखिर मकर संक्राति क्यों मनाते है मकर संक्राति का महत्व और मकर संक्राति कब है 2021दोस्तों आज सभी को पता ही होगा भारत अपनी सांझी संस्कृति के लिए विश्व भर प्रसिद्ध है यहाँ बहुत सारे त्यौहार मनाये जाते है जैसे – दीपावली , होली ,ईद ,क्रिसमस आदि . लेकिन हर एक त्यौहार मनाने के पीछे बहुत सारी कहानिया या उनका इतिहास जुड़ा रहता है हमारी कोशिस रहती है आपको हर बाते आप तक पहुचाये हम सभी उनके पीछे के कारणों को भी समझे ताकि हम और हमारी आने वाली पीढ़िया भी याद रखे चलिए शुरू करते है –

मकर संक्रांति क्यों मनाते है

हर इन्सान के मन में जरुर सवाल उठता है किसी भी कार्य को करने से पहले उसके बारे में जान लेना हम इंसानों की आदत है चलिए जानते है मकर संक्राति क्यों मनाई जताई है –हर साल मकर संक्राति का पर्व जनवरी माह के 14 या 15 तारीख की मनाया जाता है कहा जाता है इन दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर जाता है और मकर राशि में प्रवेश करने के साथ सूर्य उत्तरायण भी होने लगता है इस समय को बेहद शुभ माना जाता है.जब सूर्य एक राशि से दुसरे राशि में प्रवेश करता है इसे संक्राति भी कहा जाता है .यह त्योहार पूरे देश भर में मनाया जाता है.मगर कई जगह पर इसे मकर संक्रांति के नाम से तो कई जगहों पर इसे अलग अलग नामों से जाना जाता है.जैसे तमिलनाडु में पोंगल पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति आदि.

मकर संक्राति की कथा

इसके पीछे भी कथाए जुडी है मान्यताये इस दिन श्रीमद्भागवत और देवी पुराण के अनुसार शनि देव का अपने पिता के साथ वैर भाव था इसका कारण था सूर्य देव ने उनकी माता छाया की अपनी दूसरी पत्नी संज्ञा के पुत्र यमराज से भेद-भाव करते सूर्य देव को देख लिए इसी बात से नाराज होकर सूर्य देव ने संज्ञा और उनके पुत्र शनि की अपने से अलग कर लिया था इसी कारण शनी और माता छाया से सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया था.आगे उनके दुसरे पुत्र यमराज को यह देखकर बहुत बुरा लगा और पिता के कुष्ठ रोग को दूर करने के लिए तपस्या करने लगे इसके उपरांत सूर्य देव क्रोधित होकर शनि देव के घर कुम्भ जिसे शनि की राशि कहा जाता है उसे जला दिया . तत्पश्चात शनि देव और उनकी माता छाया को दुःख झेलना पड़ा. यमराज ने अपने सौतेली माता और भाई को देखकर दुःख हुआ और पिता सूर्य को काफी समझाया तब जाकर सूर्य देव ने कहा कि जब भी शनि के दुसरे घर में मकर आयेंगे तब शनि के घर को घन से भर देंगे इस बार से खुश होकर शनि देव ने कहा कि मकर संक्रांति को जो भी सूर्यदेव की पूजा करेगा उसे शनि की दशा नहीं भोगनी पड़ेगी.

भीष्म पितामह ने त्यागे थे मकर संक्रांति को प्राण

भीष्म पितामह महाभारत के सबसे पुराने योद्धाओं में से एक थे.उन्हें मनचाही मृत्यु पाने का वरदान प्राप्त था.महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों से छलनी कर दिया था.तो भीष्म पितामह ने मृत्यु के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया और मकर संक्रांति के दिन ही प्राण त्यागे क्योंकि सूर्य का उत्तरायण होना एक शुभ संकेत माना जाता है.

मकर संक्रांति का महत्व क्या है

ऐसा माना जाता है – इस दिया किया गया दान सौ गुना होकर लौटता है इसलिए भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूजन करके घी ,तिल ,कम्बल ,खिचड़ी का दान दिया जाता है .

मकर संक्राति के दिन गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम प्रयाग में सभी देवी देवताओ अपना रूप बदकर स्नान करने आते है यही कारण इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है .

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व

कहा जाता है इस दिन सूर्य उत्तरायण के बाद प्रकृति में बदलाव आने लगता है ठण्ड से राहत मिलने लगती है और शीत ऋतू की शुरुआत होने लगती है और भारत एक कृषि प्रधान देश है यहाँ बहुत सरे पर्व त्योहारों से सम्बंधित है मकर संक्रांति समय में आता है जन किसान रबी की फसल लगाकर खरीब की फसल ,धन, मक्का ,गन्ना, मूंगफली,उरद घर ले आते है इसे मकर संक्राति पर खरीब की फसलो का पर्व भी माना गया है.

मकर संक्रांति कैसे मनाते हैं

हमारे उत्तराखंड में मकर संक्रांति के दिन आटे और सूजी से घुघुते बनाए जाते हैं.उन घुघुतों को एक माला में पिरोया जाता है.सुबह बच्चे इस माला को पहनकर कौआ को बुलाते हैं और उसे घुघुते खिलाते हैं

कौवे को बुलाने के लिए कुमाऊनी भाषा में घरों में यह कहा जाता है

“काले कौआ काले

घुघुति माला खाले

ले कौआ बड़

म्यक दिजा सुनक घवड़

ले कवा पूरी

म्यक दिजा सुनेकि छुरी

कालै कवा कालै

घुघुती माला खाले

लै कवा घुघुत

म्यक् दीजा भेलि भैलि जगुत

कालै क्वा कालै घुघुती माला खाले”

मकर संक्राति 2021 विशेष

आज हमने जाना मकर संक्रांति क्यों मनाते है मकर संक्रांति का महत्व और मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है , About Makar Sankranti in Hindi , is mahine maker sankranti kab hai ,sankranti kya hai और आप मकर संक्राति निबंध भी बना सकते है धन्यवाद.

उत्तराखंड कुमाऊँ रेजिमेंट भर्ती 

 

 

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