महासू देवता की कहानी –Story Of Mahashu Devata आखिर क्यों पूजे जाते है

नमस्कार आपके लिए हाजिर हु फिर से पहाड़ो की ओर से RangiloPahad की तरफ से चलिए एक और नई कहानी के साथ महासू देवता की कहानी -Story Of Mahashu Devata ,आखिर महासू देवता कौन है? क्यों पूजा जाता है? महासू देवता की चमत्कारी शक्तियों के बारे में और महासू देवता मंदिर कहा है ? ब्लॉग पूरा पड़ने में मजा आएगा जरुर |

महासू देवता कहानी-Story Of Mahashu Devata 

बहुत समय की बात है पहाडियों के बीच और नदी के किनारे एक गाँव बसा था|नदी के आसपास एक गुफा थी जिस में एक महा प्रतापी राक्षस रहता था .मनुष्यों का आपना आहार बनाता और उसके डर से आसपास के गाँव के लोग घर से निकलना बंद कर दिया.सभी लोग भूख से व्याकुल हो गए |तब गाँव वालो ने राक्षस से समझौता कर लिया आखिर समझौता क्या था -समझौता था की गाँव में बारी-बारी(लाइन से) कोई न कोई मनुष्य उसके पास आएगा वाह उसे ही अपना आहार बनाएगा |अब क्या होता है धीरे-धीरे सब बलि चड़ने लगे और आबादी घटने लगी |

कहानी से बदलाव होता है अब –गाँव में एक बुढ़िया रहती उसके सात जवान बेटे थे |राक्षस उसके छ(6) बेटों को अपना आहार बना चुका था|बुढिया काफी परेशान हो गयी तभी उसके दिमाग में एक उपाय सुझा –अब वो क्या था -घर का आखिरी चिराग किसी तरह बुझने से बच जाये उसने अपने सातवे बेटे से कहा-बेटा हु गाँव से भाग जा में मर भी जाऊँगी तो कोई बात नहीं –मेरी तो उमर भी हो गई है ,बेटे ने जवाब दिया नहीं माँ में तुझे छोड़कर नहीं जाउंगा –माँ बोली “बेटा तू गया तो गाँव में और लोगो को भी बचा सकता है|”

बेटे ने माँ से कहा कैसे –माँ बोली ‘तू सीधे कश्मीर चला जा वह जाकर महाराज से मिलना अरु वे सबकी रक्षा करेंगे|माँ का आशीर्वाद लेकर उसका बेटा कश्मीर को और चल पड़ा बहुत मुशकिलो बाद राजा के महल के सामने पहुच गया –थका हुआ तो था और वही पर उसे गहरी नींद आगई |महल के पहरेदारो ने एक अजनबी देखा और उसे जगाया और उससे पुछा तुम कौन हो और क्यों आये हो –आने का कारण बताते हुए महाराज से मिलवाने की प्राथना की पहरेदारो ने खूब मना किया और अंत में मिलने दिया –अब क्या हुआ होगा |महाराज से उसे बुलाया –उसने बताया की उसका नाम हूण भाट है और वह महेद्र्ध का रहने वाला है और उस राक्षस के जुल्म की गाथा सुनाते हुए गाँव वालो की रक्षा की प्राथना की –महाराज से उसे आसवासन देते हु कहा “घबराने की कोई बात नहीं “ तुम सीधे अपने घर घर चले जाओ और बताया जब तुम अपने गाँव पहुच जाओ में तुम्हारी मदत के लिए पहुच जाऊंगा .

हूण भाट अपने गाँव पहुचकर गाँव वालो को सभी बाते बताई –उसने सोने का एक हल बनाया हल पर दो एक ही रूप-रंग के बछड़ो को जोता |बछड़े भी गायो के जन्मे थे जिनका कोई अंग कटा-फटा न था –अनुष्ठान की तैयारी होने लगी सभी गाँव वाले एकत्रित हुए .हूण भाट ने जमीन में हल जोता उसके फाल(हल का अगला हिस्सा) एक चीज से टकरा गई वह से एक-एक का चार मूर्तिया निकली . हूण भाट ने सभी गाँव वालो को बताया की महराज ने कहा था यह सब महराज का आदेश था –और उन्ही चारो मूर्तियों का नाम महासू ,चालदा,पवासी ,वासिक रखा गया .महेद्र्थ का नाम बदलकर हनोल रखा गया जो आज उत्तराखंड के चकराता देहरादून जनपद में है  वहा पर ही महासू देवता की मूर्ति प्रतिष्ठा कर स्थापित कर दिया और आगे चलकर महासू देवता का मंदिर बना|महासू देवता की तागत को देखकर उसे महाप्रतापी राक्षस का भी अंत हो गया और गाँव वालो को उस राक्षस से भी मुक्ति मिल गयी .

महासू देवता की कहानी
                         महासू देवता मंदिर 

आज भी महासू देवता की पूजा की परम्परा उसी प्रकार से पूजा जाता है

महासू देवता मंदिर कहा स्थित है –Mahasu Devta Temple

महासू देवता मंदिर
महासू देवता मंदिर

महासू देवता मन्दिर, हनोल, चकराता, जनपद देहरादूनउत्तरकाशी के सीमान्त क्षेत्र में टौंस नदी के तट पर बसा हनोल स्थित महासू देवता मन्दिर कला और संस्कृति की अनमोल धरोहर है। लम्बे रास्ते की उकताहट और दुर्गम रास्ते से हुई थकान, मन्दिर में पहुंचते ही छूमन्तर हो जाती है और एक नयी ऊर्जा का संचार होता है। “महासू” देवता एक नहीं चार देवताओं का सामूहिक नाम है और स्थानीय भाषा में महासू शब्द “महाशिव” का अपभ्रंश है। चारों महासू भाईयों के नाम बासिक महासू,पवासी महासू, वासिक  महासू (बौठा महासू) और चालदा महासू है। जो कि भगवान शिव के ही रूप हैं। उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, बिशैहर और जुब्बल तक महासू देवता की पूजा होती है। इन क्षेत्रों में महासू देवता को न्याय के देवता और मन्दिर को न्यायालय के रूप में माना जाता है। आज भी महासू देवता के उपासक मन्दिर में न्याय की गुहार और अपनी समस्याओं का समाधान मांगते आसानी से देखे जा सकते हैं। महासू देवता के उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश में कई मन्दिर हैं जिनमें अलग अलग रूपों की अलग-अलग स्थानों पर पूजा होती है। टौंस नदी के बायें तट पर बावर क्षेत्र में हनोल में मन्दिर में बासिक महासू (बौठा महासू) तथा महेंद्रथ नामक स्थान पर बासिक महासू की पूजा होती है। बासिक महासू की पूजा टौंस नदी के दायें तट पर बंगाण क्षेत्र में स्थित ठडियार, जनपद उत्तरकाशी नामक स्थान पर होती है।

दोस्तों महासू देवता की कहानी कैसी लगी जरुर बताये और हा अगर आपके कोई सवाल है हमें कमेंट जरुर कर जय देवभूमि उत्तराखंड

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