श्री कृष्ण जन्माष्टमी की कथा और नटखट जीवन :बाल कृष्ण लीला

श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami)

आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी है यानी भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण जी का जन्म दिवस.आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी
                                                श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाये     यह चित्र -anuragtarar जी से लिया गया 

श्रीकृष्ण के जन्म कहा हुआ

भारत के सात प्राचीन और पवित्र नगरियो में से एक है मथुरा जो आज उत्तरप्रदेश राज्य में पड़ता है |मथुरा में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था आइये जानते है कथा .

श्री कृष्ण जन्म कथा

वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण की पूरी जीवनी ही रोचक तथ्यों से भरी हुई है लेकिन उनके जन्म की कथा उन सबसे ज़्यादा रोचक और अनोखी है. तो आईये आज श्रीकृष्ण के जन्म की कथा जानते हैं.श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में

राक्षस कंस अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव को रथ पर ले जा रहा था. तभी आकाशवाणी हुई कि “जिसे तू इतने प्यार से ले जा रहा है उसी का आठवाँ पुत्र तेरा काल बनेगा.”
यह सुन कंस का प्यार गुस्से में बदल गया और वह अपनी तलवार निकाल कर देवकी को मारने लगा लेकिन वासुदेव ने रोक लिया और कहा कि देवकी को छोड़ दो मेरी जीतनी भी संतानें होंगी में आपको सौंप दुंगा. कंस ने देवकी को ज़िंदा तो छोड़ दिया मगर उन दोनों को कारागार में बंद कर दिया. कुछ समय बाद देवकी का एक पुत्र हुआ जिसे कंस ने पटक कर मार दिया और ऐसे ही देवकी के सात पुत्र कंस ने मार दिए. जब आठवें पुत्र के जन्म का वक्त आया तो कंस और डरने लगा उसने और ज़्यादा पहरा बड़ा दिया.

आखिरकार अष्टमी के दिन ठीक आधी रात को देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र यानी भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ. तो कहा जाता है कि कारागार के ताले खुद-ब -खुद खुल गये हाथ से बेड़ियाँ अलग हो गयी पहरा देने वाले पहरेदार भी सो गये. तब भगवान विष्णु वासुदेव के सामने प्रकट हुए और कहा कि आप इसे यमुना नदी के पार नंद बाबा के घर छोड़कर आएं और उनकी पुत्री को यहां ले आएं. वासुदेव ने ऐसा ही किया.

उस समय घनघोर बारिश हो रही थी तो शेषनाग ने भगवान श्रीकृष्ण के ऊपर छत्रछाया की.यमुना नदी का पानी काफ़ी बड़ गया था लेकिन जैसे ही श्रीकृष्ण के पैरों ने नदी के पानी को छुआ यमुना का पानी खुद ही कम हो गया. इसके बाद वासुदेव श्रीकृष्ण को नंद बाबा के यहां छोड़कर आए और उनके यहां से उनकी बेटी को ले आए.

सुबह जब कंस को पता चला कि देवकी के गर्भ से बेटी का जन्म हुआ है तो कंस उसे लाकर जमीन पर पटकने लगा लेकिन जैसे ही उसने जमीन पर पटका वो कन्या माया का रूप लेकर आसमान में उड़ गयी और कंस से कहा कि मुझे मारकर तू क्या करेगा तेरा काल को पहले ही इस धरती पर आ चुका है.इसके बाद कंस को भय सताने लगा श्रीकृष्ण नंद बाबा के यहां पलने लगे और ग्वाल बालों के साथ मिलकर अपनी लीलाएँ दिखाने लगे. वृंदावन से काफ़ी ज़्यादा मख्खन मथुरा को जाता था लेकिन श्रीकृष्ण और उनके दोस्त वह सारा माखन चोर के खा देते थे. जब मथुरा में माखन नहीं पहुँचने लगा तो कंस ने वृंदावन को तहस नहस करने के लिए सैनिक भेजे लेकिन श्रीकृष्ण ने उन्हें हरा दिया इसके बाद कंस के कई राक्षस कृष्णा को मारने के लिए भेजे लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने सबका वध कर दिया और अंत में कंस को भी मार दिया. इस प्रकार कंस जैसे राक्षस का अंत भगवान श्रीकृष्ण ने किया.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है

अब आप ही जान गए होंगे कान्हा बचपन से नटखट और सबको परेशान करते और सबका मन मोह लेते उनकी यह लीला पर पुरे भारत में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव भी मनाया जाता है.

उत्तराखंड में ऐसे बहुत उत्सव और त्यौहार मनाये जाते है जिनके बारे में आप पड़ सकते है

हम प्रार्थना करते है कान्हा की कृपा आप बन बनी रही श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं उम्मीद करते है आपको यहाँ आर्टिकल पसंद आया होगा शेयर भी करे और कमेंट भी करे .जय देवभूमि उत्तराखंड

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