Khatarua Festival In Uttarakhand–कुमाऊँ में खतड़वा त्यौहार क्यों ,कैसे मनाते है?

Devbhoomi Uttarakhand के  kumaon के क्षेत्रो में मनाया जाने वाला प्रमख त्यौहार या लोक उत्सव खतड़वा त्यौहार(Khatarua Festival) इसे गाईत्यार (पशुधन को समर्पित ) का त्यौहार भी कहा जाता है|उत्तराखंड का अधिकतर जिले पहाड़ी क्षेत्रो से भरा है जहा कृषि और पशुपालन मुख्य व्यवसाय भी है – खतड़वा त्यौहार भी इसी से सम्बन्धित है |आइये जानते है Rangilopahad के साथ एक और उत्तराखंड के प्रसिद्ध त्यौहार के बारे में आखिर क्या मान्यताए है और क्यों और कैसे मनाया जाता है ब्लॉग काफी मजेदार होने वाला है –चलिए शुरू करते है|

Khatarua(खतड़वा) क्या है?-उत्तराखंड में कुमाऊँ के क्षेत्रो में मनाया जाने वाला त्यौहार है और यह कुमाऊँनी संस्कृति का प्रतीक भी माना गया है.इसे गाईत्यार भी कहा गया है.पर्वतीय इलाको में लोगो का मुख्य व्यवसाय खेती करना और पशुपालन ही है और किसान की मूल संपत्ति उसकी भूमि और पशु है |इन्ही कारण इस जगहों पर प्रकति और पशुओ से सबंधिंत अनेक त्यौहार समय-समय या ऋतु परिवर्तन के अनुसार मनाये जाते है और उन त्योहारों को एक लोक पर्व के रूप में मनाया जाता है |

Khatarua(खतड़वा) त्यौहार कब मनाया जाता है ?

इसे वर्षा ऋतु के समाप्त होने और शरद ऋतु के प्रारंभ यानि अश्विन माह के प्रथम(कन्या संक्रांति) सितम्बर माह में मनाया जाता है और खास बात यह है सिर्फ कुमाऊँ में ही मनाया जाता है

Khatarua(खतड़वा) Festival क्यों मनाया जाता है ?महत्व क्या है ?

अब यह भी जानना जरुरी है आखिर खतड़वा मनाया क्यों जाता है और महत्व क्या है |असल में इसकी दो-तीन अलग  ल-अलग मान्यताये बताई गई है .

1-पशुओ को समर्पित लोकपर्व

कहा गया है यह त्यौहार गायो के साथ सभी पशुओ की समर्पित लोक पर्व है –पशुओ की बीमारियाँ दूर हटे यानि वर्षा काल में अनेक तरह के कीड़े –मकोड़े जन्म लेते है और गाय के गोठो(जहा पशुओ का रहने का स्थान ) इसलिए त्यौहार के शाम के समय अग्नि प्रज्वलित कर इस रोगों को जानवरों से दूर रखने की कोशिश की जाती है (हाव् बयाव) भी कहते है और खतड़वा को जलाते समय उसमे कुछ अग्नि की मशालो को लेकर गाय के गोठो में भी घुमा दिया जाता है और धुएं को कुछ समय के लिए गोठो में भर दिया जाता है .इससे इस जगह में कीड़े मकोड़े भाग जाते है .

2-राजा खतड़ सिंह को पराजित की ख़ुशी में

कुछ जगहों पर इसे उत्सव के रूप में मनाते है आखिर कहानी क्या है मुख्य कुमाऊँ के किताबो के अनुसार गीतों के अनुसार “गेडा सिंह  की जीत खतड़वे सिंह की हार “  इसे कुमाऊँनी सेना का गढ़वाली सेना पर जित का प्रतीक भी बताते है .इस युद्ध के कुमाऊँनी सेना का नेतृत्व गेडा सिंह और गढ़वाली सेना का नेतृत्व खतड़ सिंह कर रहा था .इसमें गेडा सिंह ने खतड़ सेना को हराने में विवश कर दिया .इस जित की ख़ुशी में मनाया जाता है .

Khatarua(खतड़वा) त्यौहार कैसे मनाते है

अब आप जन चुके है Khatarua(खतड़वा) क्या है अब कैसे मनाया जाता है . सांय काल में उचे टीले पर घास-फूस की झाडिया को काट कर एकत्र करते है .पेड़ो की टहनिया को सजाया जाता है –वहा पर “पुल्या” नामक घास के दो पुतले बनाते है .सांय काल के समय चीड के पेड़ के छिलके (छियुल)की मशाले जला कर वहा पर पहुचते है जिसमे सभी गाँव वाले एकत्रित होते है हाथ में मशाल और ककड़िया भी ले जाते है प्रसाद के रूप में और सभी एकत्रित होकर घास –फूस के पुतले पर आग लगा कर हर्षौल्लास के साथ चारो और कूदते है .अंत में अग्नि के शांत होने के बाद ककड़ी काटते है और उसके बीच को अपने माथे में भी लगाते है |इसके सबंध में ऐसा भी कहा गया है इसे लगाने के बाद भूत-प्रेत आदि दुष्टआत्माए निकट नहीं आती है .

में आपको कुछ आज के खतड़वा के चित्र भी साझा कर रहा हु जिससे और आसानी से समझ में आएगा .

khatarua festival uttarakhand
खतड़वा त्यौहार मनाने की तैयारी करते बालक
khatarua tyohar
खतड़वा (Khatarual) जलता हुआ

 

khatarua festival uttarakhand
ककड़ी काटते हुए बालक

Devbhoomi Uttarakhand के  kumaon के क्षेत्रो में मनाया जाने वाला प्रमख त्यौहार या लोक उत्सव खतड़वा त्यौहार(Khatarua Festival) इसे गाईत्यार (पशुधन को समर्पित ) का त्यौहार कैसा लगा आपको ब्लॉग जरुर पसंद आया होगा

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