केदारनाथ मंदिर का इतिहास क्या है?मंदिर से जुड़ी प्राचीन कहानिया

केदारनाथ मंदिर के बारे में अतभुत जानकारी- story of kedarnath चारो और पर्वतों से घिरा यहाँ के सुदूर घटिया और वादिया हर किसी को लुभा लेती है,जी हा दोस्तों आज मजा आने वाला है हम बात कर रहे देवभूमि उत्तरखंड में स्थित बाबा kedarnath मंदिर के बारे में अतभुत जानकारी और जुड़े रहस्य के बारे में ,हम आपको महसूस कराने की पूरी कोशीस करेंगे केदारनाथ मंदिर के दर्शन हो जायेंगे ,जय बाबा केदारनाथ और बताने जा रहे है केदारनाथ मंदिर का इतिहास .केदारनाथ मंदिर कहाँ पर है? और केदारनाथ कौन सा राज्य में है?अन्य जानकारी के बारे में मंदिर से जुडी प्राचीन कहानिया क्या है ?केदारनाथ में किसकी पूजा होती है?केदारनाथ का नाम कैसे पड़ा? इसलिए ब्लॉग पूरा पड़े

केदारनाथ मंदिर कहाँ पर है?

भारत के 27 वा राज्य देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड के गढ़वाल में स्थित रुद्रप्रयाग जिले में मन्दाकिनी नदी के घाट पर भगवान शिव का भव्य मंदिर है जो की केदारनाथ के नाम से जाना जाता है .

केदारनाथ मंदिर का इतिहास
केदारनाथ मंदिर का इतिहास

केदारनाथ धाम मंदिर का इतिहास(history of kedarnath temple)

केदारनाथ मंदिर के बारे में बहुत सी प्रचलित कहानिया जुडी है ,अभी तक इसका उचित प्रमाण साफ नजर नहीं आये है ,केदारनाथ मंदिर बहुत सदियों पुराना मंदिर है

एक कथा के अनुसार –इस स्थान पर भगवान नर नारायण ऋषि मुनि भगवान शिव की तपस्या करते थे ,नारद मुनि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वरदान प्राप्त हुआ.

पुराणों या कथा के अनुसार –यह कथा पांडवो पर है –दोस्तों महाभारत की कहानी आपनी भी सुनी ही होगी और कहानी इसी के आधार पर है जब महाभारत के योद्ध में पांडवो ने अपनी भाइयो कौरव को पराजित किया ,जिससे भगवान शिव उनसे नाराज हुए और ,पांडव पुत्र इस भ्रातहत्या पाप से मुक्ति पाना चाहते और भगवन शिव से आशीर्वाद चाहते ,भगवान shiv के दर्शन के लिए पांडू पुत्र उनकी खोज में निकल पड़े और काशी पहुचे लेकिन शिव उन्हें वह नहीं मिले और खोजते हिमालय तक पहुच गए .भगवान शंकर पांडवो को दर्शन नहीं देना चाहते और केदार में जा बसे.

पांडव पुत्र अपने लगन और साहस के पक्के होते हुए और उनका पिछा करते केदार भी पहुच गए ,भगवान शकर ने बैल रुप धारण कर दिया और बैलो के झुण्ड में घुस गए ,पांड्वो को संदेह हो गया तभी भीम ने अपना बलशाली रूप धारण कर दो पहाड़ो पर पैर फैला दिए,अत: सभी बैल पैर के निचे से निकल गए ,लेकिन शंकर जी रूपी बैल पैर के निचे से जाने के लिए तैयार नहीं हुआ ,भीम बैल पर झपटे जिससे बैल भूमि में अंतध्यान या धसने लगा ,तब भीम ने बैल की पीठ का भाग(कुबड़) पकड़ लिया.भगवन शंकर पांड्वो की शक्ति और द्रण संकल्प देखकर प्रसन्न हो गए ,अपने तत्काल दर्शन देकर पांडवो को पाप से मुक्त कर दिया.उसी समय से भगवान शिव के बैल के पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते है

kedarnath मंदिर की और विशेष जानकारी

केदारनाथ धाम मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक 5 ज्योतिर्लिंग है ,एसा भी माना जाता है शिव जी का उपर का भाग नेपाल के काठमांडू में प्रकट हुआ और वही भगवान पशुपति नाथ के नाम से जाना गया .

केदारनाथ में किसकी पूजा होती है?

भगवान शिव की पूजा तो भारत में नहीं पुरे विश्व में की जाती है लेकिन खास बात है देवभूमि उत्तराखंड के शिव की पूजा कुछ अलग रूप में की जाती है जिसमे शिव की भुजाओ (हाथो) के पूजा उत्तराखंड का सबसे उचा मंदिर तुंगनाथ में की जाती है ,यह मंदिर भी रुद्रप्रयाग में ही स्थित है शिव की मुख की पूजा –रुद्रनाथ और शिव की नाभि की पूजा –मह्देश्वर ,शिव की जटाओ की पूजा –कल्पेश्वर और इसलिए चारो स्थानों में केदारनाथ धाम को पञ्च केदार भी कहा जाता है

केदारनाथ मंदिर का आस पास का द्रश्य भी अतभुत है

मन्दाकिनी की घाट पर पहाड़ी सेली पर बना मंदिर केदारनाथ है ,इस धाम के तीनो तरफ विशाल पर्वतों से घिरा हुआ है ,एक तरफ से हजारो फिट उचा केदारनाथ पर्वत और दूसरी तरफ खर्चकुण्ड और भरतकुण्ड है और आस पास  मन्दाकिनी और मधुगंगा और स्वर्गरोहणी ,सरस्वती चारो जलधाराए हिमालय के शिखरों से प्रकट होती है

आदि गुरु शंकराचार्य का मन्दिर और उनके बारे में जानकारी

कहा जाता है इस मंदिर का जीर्णोद्धार जगत गुरु शंकराचार्य ने कराया था और ३२ वर्ष की आयु में 820ई0 में उनकी यही म्रत्यु यही हुई ,उनका यहाँ मंदिर भी स्थपित है

केदारनाथ मंदिर में भगवान शिव की पूजा

भगवान का शिवलिंग नुकिलो चट्टान की तरह है ,और भीतर अंधकार रहता है भक्त दीपक से दर्शन करते है और घी और जल चडाते है इस मंदिर में भूरे रंगों के पत्थरो का इस्तेमाल हुआ है यह मंदिर कत्युरी शेली के निर्माण के आधार पर बना हुआ है .मंदिर का सिखर ताम्बे का है

kedarnath मंदिर के दर्शन जरुर करे बाबा का आशीर्वाद सब भक्तो पर बने रहे और उत्तराखंड निवासियों के लिए अभी 1 जुलाई से char dham yatra 2020 के दर्शन के लिए नियमानुसार जा सकते है ई-पास के जरिये ऑनलाइन आवेदन होंगे.

मुख्य  पूछे जाने वाले सवाल

  • केदारनाथ की फोटो
  • केदारनाथ कहा स्थित है ?
  • केदारनाथ कैसे पहुचे?
  • केदारनाथ का नाम कैसे पड़ा?
  • केदारनाथ मंदिर कहाँ पर है?
  • केदारनाथ में किसकी पूजा होती है?
  • केदारनाथ कौन सा राज्य में है?

kedarnath mandir के बारे में  हमने पूरा प्रयाश किया आपको भगवान शिव जी के 5 ज्योतिर्लिंग केदारनाथ मंदिर का इतिहास क्या है? और आपको सभी सवालो के जवाब मिल गए होंगे ?आपका कैसा लगा  कमेंट करना ना भूले –टीम रंगिलोपहाड़

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