कार्तिक पूर्णिमा का क्या महत्व है? लोग कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान क्यों करते हैं?

कार्तिक माह को भगवान विष्णु का माह माना जाता है और इसके शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है.क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य के रूप में अवतार लिया था.इसके अलावा भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध भी इसी दिन किया था. साथ ही इस दिन गुरु नानक जी की जयंती भी मनाई जाती है.क्योंकि सिक्खों के पहले गुरु श्री नानक देव जी का जन्म भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही हुआ था.कार्तिक पूर्णिमा के दो और नाम है त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान और आज हम बताने जा रहे है Kartik Purnima Ki Katha और कार्तिक पूर्णिमा का क्या महत्व है? ब्लॉग पूरा पड़े .

कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान क्यों करते हैं?

प्रत्येक पूर्णिमा को गंगा स्नान किया जाता है कुछ लोग वर्ष भर कि हर पूर्णिमा को स्नान करते हैं l जो लोग ऐसा नहीं कर पाते वह कार्तिक पूर्णिमा ,गंगा दशहरा, या मौनी अमावस्या को अवश्य गंगा स्नान करने का प्रयास करते हैं इन स्नानओं का अधिक फल होता है l

Kartic Purnima Puja Vidhi 2020

कार्तिक पूर्णिमा पूजन विधि -कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त के समय उठकर स्नान करना चाहिए .इस दिन गंगा जल डालकर स्नान करना या किसी पवित्र नदी में स्नान करना  काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.इसके बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान लक्ष्मी नारायण जी की विधिवत पूजा करनी चाहिए.कार्तिक पूर्णिमा को भगवान सत्यनारायण की कथा कहने और सुनने का भी विशेष महत्व है.साथ ही इस दिन हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र पौधे की पूजा भी की जाती है और कहा जाता है कि इसी दिन तुलसी धरती पर अवतरित हुई थी.

Kartik Purnima Ki Katha

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कार्तिक पूर्णिमा मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं

कथा 1 -त्रिपुरासुर वध की कथा

त्रिपुरासुर एक बहुत ही शक्तिशाली राक्षस था.उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था.क्योंकि उसे भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद प्राप्त था.इस कारण सारे देवता मिलकर भी उसे नहीं हरा पा रहे थे.जिस कारण सभी देवता भगवान ब्रह्मा के पास गए और उनसे त्रिपुरासुर का वध करने का उपाय पूछा.भगवान ब्रह्मा ने शिव भगवान के पास जाने का सुझाव दिया और इसके बाद सभी देवता भगवान शिव के पास गए और उनसे त्रिपुरासुर का वध करने की विनती की.इसके बाद भगवान शिव ने जाकर त्रिपुरासुर का वध किया और तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त किया.इसके बाद भगवान शिव त्रिपुरारी कहलाए और इस दिन तो त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाने लगा

कथा 2 -भगवान विष्णु ने लिया था मत्स्य अवतार

बहुत समय पहले एक राक्षस था हयग्रीव वो वह वेदों को चुराकर ले गया था.जिस कारण भगवान विष्णु को मत्स्य अवतार लेना पड़ा.सुबह जब सत्यव्रत मनु सूर्य देव को जल चढ़ा रहे थे तो एक छोटी और सुनहरी मछली उन्हें दिखी उसे देख सत्यव्रत मनु को दया आ गई और उसे अपने कमंडल में डाल दिया लेकिन कुछ देर बाद ही वह मछली ने पूरे कमंडल को घेर दिया उसके बाद सत्यव्रत ने उस मछली को एक बड़े बर्तन में रख दिया लेकिन वह मछली बड़ी हो गई.फिर सत्यव्रत ने उसे तालाब में डाल दिया लेकिन कुछ समय बाद ही मछली ने तालाब के आकार के बराबर का रूप ले लिया और इसके बाद सत्यव्रत ने मछली को समुद्र में डाल दिया लेकिन मछली ने कुछ समय बाद ही पूरे समुंदर को भर दिया.इस पर सत्यव्रत ने कहा तुम कोई आम मछली नहीं हो सकती कौन हो तुम-मछली से भगवान विष्णु प्रकट हुए और कहा कि आज से सातवें दिन सृष्टि का प्रलय होने वाला है.आप बीज औषधियां और सप्तऋषियों को एकत्र कीजिए और मेरी भेजी हुई नाव में जाइए.इसके बाद भगवान विष्णु ने हयग्रीव का वध किया और वेदों को अपने साथ ले आए.


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