काकू फल :जापानी फल के नाम से मशहूर काकू फल खाने के फायदे और कहानी

जापानी फल के नाम से मशहुर काकू फल

काकू फल खाने में स्वाद देता है रह पहाड़ो में पाया जाने वाला फल है
काकू फल -Persimmon Fruits

जिसे अंग्रेजो द्वारा लाया गया भारत आज बन रहा कई रोगों का रामबाण इलाज कोई भी फल चाहे खाने में वह कितना ही स्वादिष्ट क्यों ना हो,भले ही कितना ही अच्छा दिखता हो लेकिन कुछ समय बाद वह सड़ने लगता है और उसमें कीड़े पड़ जाते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताऐंगे जो चाहे कितना भी सड़ जाए कितना भी पुराना हो जाए लेकिन उसमें कभी कीड़े नहीं पड़ते. ऐसे फल का नाम है काकूफल जी हां काकू फल यह चाहे कितना भी सड़ जाए लेकिन इसमें कभी भी कीड़े नहीं पड़ते. काकू फल विदेशों में भी होता है जहां इसका नाम काकी है.काकू फल जब कच्चा होता है तो खाने में कुछ अजीब सा होता है और खाते समय गले में लगने लगता है. लेकिन पकने के बाद यह काफ़ी स्वादिष्ट होता है.

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काकू फल खाने के लाभ:-

काकू फल जिसका नाम PERSIMMON फ्रूट्स भी कहा जाता है  पेट के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद माना जाता है और यह पेट की कब्ज को दूर करता है. इसे बुखार कम करने के लिए भी खाया जाता है.काकू ऐसे फलों में गिना जाता है जिनमें एंटी औक्सीडैंट तत्व पाए जाते हैं. इसमें पाए जाने वाले तत्व कैंसर और कमज़ोर नज़र जैसी बीमारियों का असर कम करने में भी कारगार हैं.

काकू फल की कुछ चर्चित कथाये

काकू फल में कीड़े क्यों नहीं पड़ते इसके पीछे हमारे पहाड़ों में एक पौराणिक कथा भी बतायी जाती है जो कि महादेव शिव की अर्धांगिनी पार्वती से जुड़ी हुई है. एक बार जब पार्वती देवी को अपने मायके जाने का मन हुआ तो उन्होंने भगवान शिव से कहा “मुझे मायके गये हुए बहुत समय हो गया है मुझे अपने मायके जाना है”जिस पर भगवान शिव ने कहा”में तो नहीं आ सकता तुम अकेली कैसे जाओगी.जंगल का रास्ता है कहीं रास्ता भटक गयी तो”
लेकिन देवी पार्वती नहीं मानी और मायके जाने की ज़िद करने लगी. जिस कारण भगवान शिव ने ना चाहते हुए भी देवी पार्वती को मायके जाने दिया और कहा कि “अगर रास्ता भूल जाओ तो जो भी रास्ते में मिले उससे रास्ता पूछ लेना”
इसके बाद पार्वती अपने मायके को जाने लगी. वह काफ़ी खुश थी क्योंकि काफ़ी वर्षों बाद मायके जा रही थी. जंगल का रास्ता था तो वह रास्ता भटक गयी. जंगल में कोई भी इंसान नहीं दिखने के कारण देवी पार्वती ने पेड़ पौधों से रास्ता पूछा. सबसे पहले उन्होंने किल्मोड़े के पेड़ से पूछा”ऐ किल्मोड़े के पेड़ मैं अपने मायके जा रही हूँ और रास्ता भटक गयी हूँ मुझे अपने मायके जाने का रास्ता बता दे”
जिस पर किल्मोड़े के पेड़ ने कहा”मैं नहीं जानता तुम्हारा मायका कहां है जहां जाना है जाओ”
इसके बाद देवी पार्वती ने आम,अमरूद,अनार आदि पेड़ों से रास्ता पूछा लेकिन किसी ने भी नहीं बताया. अंत में देवी पार्वती थक कर और दुखी होकर एक पेड़ की छाँव में बैठ गई तो उस पेड़ ने देवी पार्वती से पूछा”तुम इतनी दुखी क्यों हो और इस जंगल में क्या कर रही हो”
इस पर देवी पार्वती ने उस पेड़ को अपनी सारी व्यथा बताई,तो उस पेड़ ने कहा”मैं तुम्हें तुम्हारे मायके जाने का सही रास्ता बताऊँगा.यह पेड़ काकू का था. इसके बाद काकू के पेड़ ने देवी पार्वती को उनके मायके का रास्ता बताया और वह सकुशल अपने मायके पहुँच गई. इसके बाद जब वह मायके से वापस आई तो उसने काकू के पेड़ का धन्यवाद अदा किया और आशीर्वाद दिया कि तुझमें लगे फल को कोई कच्चा नहीं खा पाएगा और तेरा फल चाहे कितना भी सड़ जाए उसमें कभी कीड़े नहीं पड़ेंगे और अन्य पेड़ों को श्राप दिया कि सड़ने के बाद तुममें लगने वाले फलों में कीड़े पड़ जाएंगे और वह खाने लायक नहीं रहेंगे. तो दोस्तो ऐसा माना जाता है कि इसी कारण काकू के फल में कभी कीड़े नहीं पड़ते और कच्चा खाने पर वह गले में लगने लगता है
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जय देवभूमि उत्तराखंड
धन्यवाद

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