इंडियन आर्मी जसवंत सिंह रावत की कहानी अभी भी जिन्दा है 72 घंटे में 300 चीनियों को मौत के घाट पहुचाने वाला

14000 फिट की ऊंचाई कड़ाके की ठंड बॉर्डर पर अकेले सामने चीन की हथियारों से लदी हुई सेना ऐसा दृश्य सोचकर ही डर लगने लगता है तो सोचो अगर हकीकत में हो जाए तो क्या होगा.ये कहानी है पौड़ी गढ़वाल के भारतीय सेना के जवान महावीर चक्र से सम्मानित जसवंत सिंह रावत की.जिन्होंने अकेले ही पूरी चीनी सेना को 72 घंटे तक रोके रखा इतना ही नहीं चीन के करीब 300 सैनिकों को भी मार गिराया.ये अकेले एक ऐसे योद्धा हैं जिनकी बहादुरी पर चीन भी उन्हें नमन करता है और उनके स्मारक पर सर झुकाता है. जिनकी वजह से आज अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है.आइए जानते हैं आज इस वीर योद्धा की कहानी को जो मरने के बाद भी हमारे बॉर्डर की रक्षा करता है.जसवंत सिंह रावत की कहानी.

राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की कहानी

जसवंत सिंह रावत कौन थे,क्या आप उनके बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं?

जसवंत सिंह “जसोल” कौन थे?उत्तराखंड ये एक ऐसा राज्य है जिसके कई वीर सपूत भारत मां की रक्षा करते हैं. कईयों ने अपने लहू से इस देश की मिट्टी की रक्षा की है ऐसे ही एक महान योद्धा हैं जसवंत सिंह रावत

जसवंत सिंह रावत का जन्म और निवास स्थान

 

जसवंत सिंह रावत कौन है?आपके मन में सवाल होगा इंडियन आर्मी के जवान जसवंत सिंह रावत (indian soldier Jaswant Singh rawat)का जन्म 19 अगस्त 1941 को पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था इनके पिता का नाम गुमान सिंह था.बचपन से ही इनका सपना भारतीय सेना में जाने का था इसी कारण 19 वर्ष की आयु में ही जसवंत सिंह रावत इंडियन आर्मी में भर्ती हो गए थे.हालांकि इससे पहले भी ये 17 साल की उम्र में आर्मी में भर्ती होने गए थे पर कम उम्र के कारण इनका सिलेक्शन नहीं हो पाया.14 सितंबर 1961 को वीर योद्धा जसवंत सिंह रावत जी ने ट्रेनिंग  भी पूरी कर ली थी.

भारत चीन युद्ध (bharat china yudh) 1962

जसवंत सिंह रावत इंडो चाइना वॉर 1962 जसवंत में जब भारत चीन युद्ध हुआ तब जसवंत सिंह रावत अरुणाचल प्रदेश के तवांग के नूरानंग में अपनी बटालियन से साथ तैनात थे.कड़ाके की ठंड थी और 14000 फिट की ऊंचाई थी.चीनी सेना तवांग से आगे की ओर बढ़ रही थी.तभी हथियारों और संसाधनों की कमी के कारण पूरी बटालियन को वापिस बुला लिया गया.लेकिन तीन लोग जसवंत सिंह रावत, लांस नायक त्रिलोक सिंह नेगी और गोपाल सिंह गोसाईं जाने को तैयार नहीं हुए और मोर्चा संभाले रखा.उन्होंने चीनी सेना की एक मशीन गन को अपने कब्जे में ले लिया जो भारतीय गढ़ की तरफ बढ़ रही थी लेकिन इसमें त्रिलोक सिंह नेगी और गोपाल सिंह गोसाईं शहीद हो गए .अब केवल जसवंत सिंह रावत ही वहां बचे हुए थे.किवदंती है कि उनके साथ उसी इलाके में रहने वाली मोनपा जाति की दो युवतियां नूरा और सेला भी थी.जिनकी सहायता से जसवंत सिंह ने तीन अलग अलग जगहों पर मशीन गन और टैंक लगाए और एक एक करके तीनों जगह से चीनी सेना पर गोलाबारी करने लगे.इससे चीनी सैनिकों को ये अहसास हुआ कि आगे एक पूरी सेना है.ऐसा करते करते जसवंत सिंह रावत ने 300 चीनी सैनिकों को मार गिराया था और 72 घंटे तक चीनी सेना को रोके रखा उसके बाद 17 नवंबर 1962 को एक रसद पहुंचाने वाला चीनी सेना के हाथ लग गया और चीनी सैनिकों के पूछने पर उसने जसवंत सिंह का पता बता दिया .जसवंत सिंह रावत को घेर लिया गया इसमें सेला की मृत्यु हो गई और नूरा को चीनियों ने बंदी बना लिया.जब जसवंत सिंह रावत जी को अहसास हुआ की वो अब चीनी सैनिकों के हाथ लग जाएंगे तो उन्होंने खुद को गोली मार दी.कहा जाता है कि चीनी जसवंत सिंह के सर को काटकर चीन ले गए और युद्ध की समाप्ति के बाद भारत को जसवंत सिंह का सर वापस किया और साथ ही जसवंत सिंह की पीतल से बनी हुई प्रतिमा भी दी.

महावीर चक्र से सम्मानित जसवंत सिंह रावत

जसवंत सिंह रावत को उनकी अद्वितीय वीरता और बहादुरी के लिए मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया. जहां पर इन्होंने शहादत दी वहां पर एक झोपड़ी का निर्माण किया गया जिसे बाद में मंदिर का रूप से दिया गया और इसका नाम जसवंत गढ़ रखा गया.

जसवंत सिंह रावत की आत्मा (Jaswant singh Rawat ghost)

मानना है कि जसवंत सिंह रावत की आत्मा आज भी इसी स्थान पर रहती है और बॉर्डर की रक्षा करती है.अगर कोई जवान सो जाए तो उसे उठाती है.इसी कारण आज भी जसवंत सिंह भारतीय सेना के जवान हैं.आज भी इनके नाम के आगे शहीद शब्द नहीं लगाया जाता.इनकी सेवा के लिए 5 जवान तैनात किए गए हैं. जो  रोज सुबह उठकर इनकी वर्दी को प्रेस करते हैं.रोज सुबह चाय नाश्ता और खाना भी दिया जाता है.इन्हें हर वर्ष छुट्टी भी दी जाती है तब पूरी सैन्य टुकड़ी इनकी प्रतिमा को घर लेकर आती है.इन्हें आज भी तनख्वाह मिलती है और समय समय पर इनका प्रमोशन भी किया जाता है.जिस कारण ये आज ये राइफल मेन से मेजर जनरल के पद पर पहुंच चुके हैं.सैनिकों का मानना है कि जसवंत सिंह की आत्मा आज भी उनकी रक्षा करती है और उन्हें रास्ता दिखलाती है.

एक महान योद्धा जसवंत सिंह रावत के बारे में जानकारी

तो ये थे जसवंत सिंह रावत की कहानी जिन्होंने अपने आप को भारत के लिए कुर्बान कर दिया जो मरने के बाद आज भी देश की रक्षा करते हैं.आज इनकी पुण्यतिथि है ऐसे वीर योद्धा को उनकी पुण्यतिथि पर सत सत नमन.

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