माँ भद्रकाली मंदिर बागेश्वर का रहस्मयी इतिहास हजारो साल पुराना

 माँ भद्रकाली मंदिर का रहस्मयी इतिहास हजारो साल पुराना

माँ भद्रकाली मंदिर
माँ भद्रकाली मंदिर बागेश्वर

उत्तराखंड को देव भूमि यानी देवों की भूमि कहा जाता है क्योंकि यहां ऐसे कई मंदिर स्थित हैं. जो अपने में कई प्रकार के रहस्य समेटे हुए हैं.माँ भद्रकाली मंदिर कहा स्थित है .इन्हीं मंदिरों में से एक है बागेश्वर से करीब 40km व कांडा से करीब 15km दूर सानिऊडियार स्थित माँ भद्रकाली मंदिर बागेश्वर  करीब 2000 वर्ष पुराना यह मंदिर काफ़ी प्रसिद्ध है . दूर दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं और ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की खोज नागकन्याओं ने की तो आईये जानते हैं आज इस मंदिर और यहां से जुड़े कई रहस्यों के बारे में  मंदिर से जुड़े अतभुत रहस्य

तीनों लोकों के तीन सतहों के रूप में होते हैं दर्शन“इस मंदिर की पहली खास बात. यह है कि यहां तीनों लोकों के दर्शन तीन सतहों के रूप में किए जा सकते हैं. गुफा के नीचे बहने वाली नदी पाताल लोक का ,गुफा का ऊपरी भाग शिव शक्ति तथा भूतल पर बना मंदिर माँ भद्रकाली के स्वरूप का दर्शन कराता है.

 कौमारी देवी गुफा मंदिर की कहानी अल्मोड़

भद्रकाली मंदिर की गुफा

माँ भद्रकाली मंदिर
माँ भद्रकाली मंदिर बागेश्वर

मंदिर इसकी अनोखी गुफा के कारण काफ़ी प्रसिद्ध है. इस गुफा के दो स्वरूप हैं ऊपरी भाग में जहां भगवान शिव की मूर्ति,देवी सरस्वती,महाकाली माता लक्ष्मी की मूर्तियाँ स्थित हैं. वहीं गुफा के निचले भाग के अंदर एक नदी बहती है जिसे भद्रेश्वर नदी कहा जाता है.यह पूरी नदी गुफा के अंदर ही बहती है. गुफा के मुहाने में जटाएँ बनी हुई हैं जिन पर से हर वक्त पानी टपकते रहता है. कुछ लोग ये जटाएँ माँ भद्रकाली की ही मानते हैं लेकिन कुछ के अनुसार ये जटाएँ भगवान शिव की हैं क्योंकि माँ भद्रकाली का जन्म भगवान शिव की जटाओं से ही हुआ है ऐसा माना जाता है.

देवी के तीनों रूपों सरस्वती,लक्ष्मी और महाकाली के एक साथ दर्शन .भारत के उन गिने चुने मंदिरों में से एक है जहां त्रिदेवियों सरस्वती,लक्ष्मी और महाकाली तीनों के एक साथ दर्शन होते हैं और तीनों की पूजा की जाती है.

 मंदिर में अंग्रेजों ने भी झुकाया था इसके आगे सर

जब पूरे भारत पर अंग्रेजों का शासन था तो वे सब जगह से कर्ज लेते थे. लेकिन इस स्थान के धार्मिक महत्व को मानकर इस स्थान को गूठ यानी कर रहित घोषित किया था.जिस कारण आज भी यहां कोई शुल्क नहीं लिया जाता.
  भगवान शंकराचार्य जी ने भी किए थे दर्शन 

भगवान शंकराचार्य से जुडी एक और कथा बद्रीनाथ मंदिर आदि गुरु शंकराचार्य जब यहां भ्रमण पर आए तो इन्होंने इस मंदिर के दर्शन किए और इस मंदिर के महत्व का बखान भी किया और इसके दर्शन करने के बाद उन्होंने अपने आप को भाग्यशाली माना.

  भद्रकाली मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

स्कंद पुराण के अनुसार माँ भद्रकाली ने छ: माह तक इस जगह पर तपस्या की थी. उसी बीच एक बार इस नदी में काफ़ी बाढ़ आ गई और पानी एक विशाल शिला की वजह से रुक गया और इस जगह पर पानी भरने लगा तो माँ भद्रकाली ने उस शिला को अपने पैरों से दूर फैंक दिया और बाढ़ का सारा पानी माँ भद्रकाली के पैरों के बीच से निकल गया.इसी कारण यहां नदी गुफा के अंदर बहती है. चैत्र माह की अष्टमी को लगता है मेला बागेश्वर भद्रकाली मंदिर 

इस मंदिर में चैत्र माह की अष्टमी को लगने वाला मेला काफ़ी महत्वपूर्ण माना जाता है. उस दिन यहां दर्शन हेतु आने वाले लोग यहां स्थित जलाशय जिसे शक्तिकुंङ कहा जाता है इसमें स्नान करते हैं. इस मंदिर में स्नान करने से सारे रोग दूर हो जाते हैं ऐसा यहां के लोगों का मानना है.

देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक

जब देवी सती ने अग्नि में कूद कर आत्मदाह कर लिया था.और भगवान शिव उनके शरीर को कैलाश ले जाने लगे तो यहां देवी सती के दायें घुटने के नीचे का भाग गिरा था. जिस कारण यह देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है
मंदिर में चमगादड़ भी काफ़ी रहते हैं लेकिन वो कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाते.इस मंदिर में चैत्र माह की अष्टमी को लगने वाला मेला काफ़ी महत्वपूर्ण माना जाता है. उस दिन यहां दर्शन हेतु .आने वाले लोग यहां स्थित जलाशय जिसे शक्तिकुंङ कहा जाता है इसमें स्नान करते हैं. और  मंदिर में स्नान करने से सारे रोग दूर हो जाते हैं ऐसा यहां के लोगों का मानना है.

चलिए आज हमने जाना उत्तराखंड देवभूमि के एक ऐसे मंदिर माँ भद्रकाली मंदिर बागेश्वर की कहानी . उससे जुड़े रहस्यमयी बाते अगर आपको पसंद आये कमेंट करना न भूले हम हमेसा आपकोअच्छी जानकारी देते रहे .

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