बागेश्वर बागनाथ मंदिर का इतिहास कई हजारो साल पुराना यहाँ भगवान शिव एक बाघ के रूप में अवतरित हुए थे

बागेश्वर का बागनाथ मंदिर बागेश्वर ज़िले का सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर है. जो कि सरयू और गोमती नदी के संगम पर स्थित है.बागेश्वर का यह शिव मंदिर उत्तराखंड के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक माना जाता है.History of Bagnath Temple Bageshwar व बागनाथ मंदिर का इतिहास,Story of bageshwar bagnath temple

बागेश्वर बागनाथ मंदिर की कहानी

कहा जाता है कि बागेश्वर में भगवान शिव एक बाघ के रूप में अवतरित हुए थे. इसलिए इसे भगवान बागनाथ का मंदिर कहा जाता है. जिसकी कहानी कुछ इस प्रकार है…

एक बार जब मार्कन्डेय ऋषि सरयू नदी के तट पर तपस्या कर रहे थे. उस समय सरयू नदी काफ़ी उफान पर थी लेकिन मार्कन्डेय ऋषि को तपस्या करते देख वह रुक गयी. जिस कारण उस स्थान पर जल भराव होने लगा. जिस पर सरयू ने भगवान ब्रह्मा से मदद माँगी. ब्रह्मा जी ने सरयू से भगवान शिव से मदद माँगने को कहा. उनके कहे अनुसार सरयू ने भगवान महादेव से मदद माँगी.

इस पर भगवान शिव ने एक बाघ का रूप लिया और देवी पार्वती ने एक गाय का रूप लिया और उस स्थान पर पहुँचे बाघ रुपी भगवान शिव गाय रुपी पार्वती का पीछा करने लगे. जिस पर गाय आवाज़ करने लगी जब मार्कन्डेय ऋषि ने गाय की आवाज़ सुनी तो तपस्या से जाग गये तो उन्होंने बाघ और गाय को देखा. तो उन्होंने बाघ रुपी भगवान शिव से कहा कि तुम इस गाय को छोड़ दो.जिस पर बाघ ने कहा ये तो मेरा भोजन है मैं इसे नहीं मारूँगा तो खाऊँगा क्या,जिस पर ऋषि ने कहा कि भले ही तुम मुझे खा लो पर इस असहाय गाय को छोड़ दो.

मार्कन्डेय ऋषि के इस त्याग से भगवान शिव काफ़ी प्रसन्न हुए और उन्हें अपने असली रूप में दर्शन दिए और उन्हें आशीर्वाद दिया और मार्कन्डेय ऋषि ने यहां पर भगवान शिव को बागनाथ के रूप में स्थापित किया. इसके बाद इस जगह को व्याघ्रेश्वर के नाम से जाना जाने लगा और धीरे धीरे इस जगह को बागेश्वर के नाम से जाना जाने लगा. इसके बाद सन् 1602 में चंद वंशीय शासक लक्ष्मी चंद ने इस मंदिर का भव्य निर्माण कराया.bagnath temple in bageshwar

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शिवलिंग -बागनाथ मंदिर बागेश्वर

बागेश्वर उत्तरायणी मेला 

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bagnath temple bageshwar,utttarakhand
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वैसे तो इस मंदिर में हर तीज त्योहार पर काफ़ी भीड़ लगी रहती है. लेकिन हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर यहां एक मेला लगता है जिसे उत्तरायणी मेला कहा जाता है. जो कि करीब एक हफ़्ते तक चलता है. इन दिनों यहां काफ़ी ज़्यादा भीड़ रहती है.इस मेले में अलग अलग जगहों से व्यापारी दुकान लगाने के लिए आते हैं. इन दिनों यहां के मैदान नुमाइश खेत में प्रदर्शनी भी लगती है और साथ ही कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. यहां उत्तराखंड के बड़े बड़े कलाकार आकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं और लोगों का मनोरंजन करते हैं.

uttarakhand bageshwar के बैजनाथ मंदिर की कहानी और इतिहास और बागनाथ मंदिर का इतिहास के बारे में हमने आज जाना .

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