हनुमान जी की कथा जानिए उनके जीवन से जुडी 5 रोचक बाते

बजरंगबली हनुमान जय बजरंगबली महाबली हनुमान जन्मोत्सव( hanuman jayanti 2021 )
महाबली हनुमान को कई नामों पवन पुत्र, केसरीनंदन, बजरंग बली महाबली आदि और भी कई नामों से जाना जाता है.भगवान राम के सबसे श्रेष्ठ भक्त और मां सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले महाबली हनुमान जी का जन्मोत्सव चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है.जो कि इस वर्ष 27 अप्रैल को है – हनुमान जी की कथा 

महाबली हनुमान जी की कथा

बजरंग बली हनुमान वानर राज केसरी और माता अंजनी के पुत्र हैं.कहा जाता है कि माता अंजनी पहले स्वर्ग लोक की एक अप्सरा थी.जिन्हें ऋषि दुर्वासा ने बानर रूप में जन्म लेने का श्राप दिया.कहा जाता है कि एक बार वानर राज केसरी कहीं जा रहे थे.तभी वो देखते हैं कि एक हाथी उत्पात मचा रहा होता है और हाथी पास में ही तपस्या कर रहे ऋषि की ओर जाने लगता है लेकिन राजा केसरी उस हाथी को मारकर ऋषि की रक्षा करते हैं जिससे प्रसन्न होकर ऋषि ने उन्हें वरदान दिया कि तुम्हारा पुत्र काफी बलवान ,बुद्धिमान होगा और कुछ समय बाद ही चैत्र पूर्णिमा के दिन बजरंगबली हनुमान का जन्म होता है.बजरंग बली पवन देव और महादेव शिव दोनों के अंश माने जाते हैं

बजरंग बली की कहानी

बचपन में हनुमान जी काफी खुरापाती किस्म के थे. ऐसे ही एक बार उन्होंने एक ऋषि को काफी परेशान कर दिया .जिससे क्रोधित होकर ऋषि ने हनुमान जी को उनकी शक्तियां चले जाने का श्राप दिया.जिससे हनुमान जी की सारी शक्तियां चली गई.फिर हनुमान जी ने ऋषि से क्षमा मांगी.तब ऋषियों ने कहा कि तुम्हारी शक्तियां तभी तुम्हें मिलेंगी जब तुम्हें कोई याद दिलाएगा.बाद में जब सभी माता की खोज में समुद्र तट पर पहुंचे तब जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्तियों का ज्ञान कराया और फिर वह पूरे समुद्र को लांघकर लंका गए और माता सीता को खोजा.हनुमान जी की कथा

हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज की कहानी

वैसे तो हनुमान जी आजन्म अविवाहित थे.लेकिन फिर भी उनका एक पुत्र था.जिसका नाम था मकरध्वज.एक बार जब हनुमान जी एक तालाब में नहाते हैं तो उनके शरीर के पसीने की बूंद तालाब की ही मछली ने पी ली बाद में जब मछली समुद्र में गई.तो एक दिन एक मछुवारे के हाथ लगी.मछुवारे ने उसे काटा तो उसके अंदर से एक बालक निकला.जिसे उसने पाला पोसा और मकरध्वज नाम रखा.मकरध्वज पाताल लोक के राजा अहिरावण का द्वारपाल था.बाद में जब हनुमान जी राम और लक्ष्मण को अहिरावण के चंगुल से छुड़ाने पाताल लोक जाते हैं तो तब उनकी मुलाकात उनके पुत्र मकरध्वज से होती है
हनुमान जी को चिरंजीवी कहा जाता है और कहा जाता है की आज भी वह जीवित हैं इसलिए उनके जन्मदिवस को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है जयंती के रूप में नहीं

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