गोवर्धन पूजा की विधि और महत्व क्या है ?रोचक भरी कहानी

च्यूड़े कैसे बनाए जाते हैं गोवर्धन पूजा विधि

दीपावली के समय वैसे तो धन की देवी महालक्ष्मी की पूजा होती है.यह मुख्यत उन्हीं का त्योहार है लेकिन इसके अलावा दीपावली पर हमारी मुख्य फसल धान की और ओखल की भी पूजा होती है.दीपावली पर ओखल में ऐपण डाले जाते हैं और ओखल पर प्रतिदिन दिया जलाया जाता है और धान की पूजा धान से बने हुए खिल और च्यूड़े के रूप में की जाती है.च्यूड़े बनाने में धान और ओखल दोनों का प्रयोग किया जाता है.इसलिए यह दोनों की एक सम्मिलित पूजा के समान है.च्यूड़े दीपावली के अगले दिन यानी गोवर्धन पूजा के दिन बनाए जाते हैं.च्यूड़े बनाने के लिए सबसे पहले धान को दीपावली से पहले एकादशी के दिन पानी में भिगोने रख दिया जाता है.वैसे च्यूड़े किसी भी धान से बनाए जा सकते हैं.लेकिन इन्हें बनाने के लिए सबसे उपयुक्त धान लाल धान को माना जाता है.और ज्यादातर लोग इसे धान से च्यूड़े बनाते हैं.गोवर्धन पूजा के दिन जब धान अच्छे से भीग जाते हैं तो उन्हें पानी से बाहर निकाला जाता है और उसके बाद ओखल के ही नजदीक एक अंगीठी या सगड़ में आग जलाई जाती है और उसमें उन धानों  को थोड़ा थोड़ा करके  भूना जाता है.एक बार जितना भूना जाता है  उसे हमारे पहाड़ों में एक घाण कहा जाता है. जब धान भुन जाएं तो उन्हें निकालकर ओखल में डाल दिया जाता है.फिर मूसल कि सहायता से उन्हें तब तक कूटा जाता है जब तक कि उनमें से छिलके बाहर ना निकल जाए.फिर उसके बाद उनको साफ किया जाता है और इन च्यूड़ों को अगले यानी भैयादूज के दिन तेल मिलाकर मंदिर में चढ़ाया जाता है और परिवार के हर सदस्य से सिर पर आशीष स्वरूप रखा जाता है. घर में बने हुए च्यूड़े खाने में काफी स्वादिष्ट भी होते हैं  गोवर्धन पूजा की विधि और महत्व क्या है ?रोचक भरी कहानी

गोवर्धन पूजा का क्या महत्व है? ये कब और कैसे की जाती है?

इसके अलावा गोवर्धन पूजा के दिन गाय बच्छियों की पूजा की जाती है.गाय बच्छियों को नहा धोकर उनकी पूजा की जाती है उन्हें तिलक लगाया जाता है और  माला पहनाई जाती है.इसके अलावा गोवर्धन पूजा में आंगन में गोबर में गोवर्धन भी बनाए जाते हैं.गोवर्धन पूजा में  माण(अनाज नापने वाला) पर बिश्वार (पिसे हुए चावल ) लगाकर गाय बच्छियों के शरीर माण से निशान भी लगाए जाते हैं.

गोवर्धन पूजा की कथा

गोकुल वासी फसल अच्छी हो इसलिए देवराज इंद्र की पूजा किया करते थे.लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा.क्योंकि गोवर्धन पर्वत से ही गोकुल के गाय-बच्छियों का पेट भरता था और गोवर्धन पर्वत की जड़ी बूटियां और फल गोकुल वासियों के लिए आजीविका का साधन भी थी.इसलिए अब गोकुल वासी इंद्र को छोड़कर गोवर्धन की पूजा करने लगे.जिस कारण देवराज इंद्र काफी क्रोधित हो गए और पूरे गोकुल में मूसलाधार बारिश करवा दी .जिस कारण पूरा गोकुल तहस नहस होने लगा.गोकुल वासी व उनके पालतू जानवर डूबने लगे.फिर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा दिया और गोवर्धन की छांव में अपने आप को सुरक्षित किया.इससे इंद्र का घमंड चूर चूर हो गया.इसी कारण इस दिन गोवर्धन पूजा की जाती है.

आज हमने क्या नया जाना 

आज हमने जाना है गोवर्धन पूजा विधि और महत्व क्या है और गोवर्धन पूजा कब और कैसे की जाती है कथाए जाने आपको जानकारी कैसे लगी आप हमने जरुर बताये .

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