उत्तराखंड के गोधन बिष्ट पहाड़ी कुच(झाड़ू) बनाकर दे रहे है स्वरोजगार को बढावा

साल 2020 का समय हर किसी साथी के लिए संघर्ष पूर्ण रहा.जब बात रोजगार की आती है .कई साथी बेरोजगार है .लेकिन में आज बात कर रहा हु  उतराखंड के नैतीताल जिले में रहने वाले होनहार गोधन बिष्ट जी स्थानीय घास के उपयोग से बना रहे झाड़ू यानि पहाड़ी कुच|इनका यह कार्य काफी प्रसंसनीय है और प्रेरणादायक है.

गोधन जी का परिचय

में गोधन सिंह बिष्ट ( रवि)  ग्राम पालडी ( बजेडी ) धनियाकोट नैनीताल से हूँ । मैंने प्राथमिक शिक्षा कक्षा 1 से 8 तक  पालडी ( बजेडी ) अपने गाँव में की फिर मैने कक्षा 9 से 12वीं तक ढेला ( रामनगर) में की क्योकि वहां पापा कार्बेट नेशनल पार्क में कार्यरत थे फिर BA  व MA रामनगर महाविद्यालय से पूर्ण की।

कैसे सिखा काम और अपने स्थानीय लोगो को भी दे रहे रोजगार

गोधन बिष्ट और साथी पहाड़ी कुच बनाते हुए-min
गोधन बिष्ट और साथी पहाड़ी कुच(झाड़ू )बनाते हुए-

मैंने अपनी मम्मी की प्रेरणा से स्थानीय घास से कुच ( झाडू  ) बनाना सिखा। उस के बाद मैंने अपने गुरु डाँ  मनीषी श्रीवास्तव जी से सम्पर्क किया उन्होंने मुझे बहुत सहयोग किया फिर मैंने अपने ग्राम प्रधान श्रीमती दीपा बिष्ट से सम्पर्क किया व साथ में कुछ दोस्तों से इस बारे मे राय ली मुझे सभी लोगों ने बहुत सहयोग किया।

यह वह कुच है जिसे में बचपन से देखते आ रहा हूँ।और आज भी हम लोग इसी झाडू का प्रयोग करते हैं।  मैं रामनगर में कोचिंग पढ़ा रहा था और साथ में खुद प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा था  तो लाकडाउन की वजह से मुझे गाँव आना पढ़ा। फिर मैंने सोचा की क्यूँ नहीं में अब इस झाडू को बाजार में लेके जाऊँ। मैंने पहले झाडू खुद ही बनाये और उन्हें बाजार में बाईक से जाकर बेचा। 2 से 3 बार मैंने ऐसा ही किया उस के बाद में गाँव के उन लोगों से मिला जो नौकरी छोड़ कर घर आये हुये थे व साथ में गाँव की महिलाओं से भी मिला।

गाँव वालो ने भी दिया साथ

गोधन बिष्ट और उनके साथी पहाड़ी कुच(झाड़ू)बनाते हुए
गोधन बिष्ट और उनके साथी पहाड़ी कुच(झाड़ू)बनाते हुए

फिर मैंने उन सभी से बोला की आप इस घास का झाडू बनाओ और मुझे बेचो में इसे बाजार में बेचूगा। लोगों को खुशी हुई की हम इस घास से अच्छे खासे पैसे कमा पायेंगे और मुझे खुशी भी हुई की गाँव के सभी लोग मेरा साथ दे रहे हैं । अभी तक में 25-30 लोगों को यह रोजगार दे चुका हूँ जो दिन के कम से कम 400 – 500 रूपये कमा सकते हैं और कहा भी रहे हैं  और धीरे – धीरे आसपास के सभी गाँव वालों को रोजगार दूंगा।

झाड़ू का नाम क्या है

इस झाडू का नाम मैंने पहाड़ी कुच रखा है। इस कुच से मैं अपने क्षेत्र को नई पहचान दिलाना चाहता हूँ अगर मुझे राज्य सरकार का सहयोग मिलता है तो मेरी यह सोच है कि उत्तराखण्ड के हर घर में इस झाडू का प्रयोग हो क्योकि यह एक स्थानिय घास है जिस का उपयोग आप अपने मन्दिर से आँगन तक प्रयोग कर सकते हो। जो भी लोग सोचते हैं कि उत्तराखण्ड में कुछ नहीं रखा है तो मुझे उन सबकी सोच बदलनी है और जो भी लोगों सोचते हैं कि क्या यह झाडू बाजार में सफल होगा तो

में उन्हें विश्वास दिलाता हूँ कि इस झाडू को प्रसिद्धि दिलाने के लिए में हर – हर शहर के दुकानदारों से मिलूंगा। और भी इस कोरोना महामारी में जो भी गरीब लोग 100-150 रूपये का झाडू नहीं खरीद सकते में उन्हें यह झाडू 25-30 रूपये में उन तक यह झाडू पहुंचाऊगा। जिस तरह से मुझे उत्तराखण्ड के हर क्षेत्र व अन्य बाहरी राज्यों से फोन आ रहा है मुझे बहुत खुशी हो रही है क्योंकि यह सब मेरे दोस्तों की वजह से हो रहा है क्योंकि मुझे बहुत सहयोग किया है। मुझे आज बहुत खुशी हो रही है क्योंकि आज मेरे वजह से मेरे गाँव का नाम आ रहा है।

टीम रंगीलो पहाड़ की ओर से शुभकामनाए आपका यह कम सफल हो और जिस तरह आप यह कम कर रहे है बहुत प्रशंसनीय है.हम सब मिलकर आपका साथ जरुर देंगे .जय देव भूमि उत्तराखंड

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कैसे ख़रीदे पहाड़ी कुच यानि झाड़ू

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