माँ बाराही धाम देवीधुरा में बग्वाल मेला 2020 नियमो अनुसार मनाया गया

देवीधुरा बग्वाल मेला 2020:पत्थर मेला

रक्षाबंधन के दिन माँ बाराही धाम देवीधुरा में बग्वाल मेला लगता है. जो कि इस दिन यहां होने वाले पत्थर युद्ध के कारण खासा प्रसिद्ध है. इस बार कोरोना महामारी के कारण यहां मेला तो नहीं लग सका लेकिन कुछ नियमों के साथ बग्वाल ज़रूर खेली गयी. बग्वाल 11 बजकर 25 मिनट पर शुरू हुई और चार मिनट तक चली. इसमें दो बग्वाली वीर घायल भी हुए हैं.

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माँ बाराही धाम देवीधुरा

देवीधुरा बग्वाल मेला
देवीधुरा बग्वाल मेला

माँ बाराही  का यह धाम लोहाघाट से करीब 45km की दूरी पर देवीधुरा नामक स्थान पर स्थित है. रक्षाबंधन के अवसर पर यहां बग्वाल मेला लगता है. इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसमें दो दल एक दूसरे पर पत्थरों से हमला करते हैं पत्थर से बचने के लिए हर किसी के हाथ में फर (एक प्रकार की ढाल ) होती है.ऐसा कहा जाता है कि जब तक एक व्यक्ति के बराबर का खून नहीं निकल जाता तब तक यह बग्वाल खत्म नहीं होती है.

बग्वाल क्यों खेली जाती है

लोकमान्यता के अनुसार माँ वाराही देवी ने यहां के लोगों से बावन हज़ार वीर और चौसठ योगिनियों से मुक्ति दिलाने हेतु नर बली की माँग की थी. इसके बाद से हर वर्ष एक नर बली दी जाने लगी. इस पर यहां के लोगों ने यह तय किया की एक की बली नहीं दी जाएगी जबकि जब तक एक मनुष्य के बराबर का खून नहीं निकल जाता तब तक पत्थरों से युद्ध खेला जाएगा

उत्तराखंड का सबसे प्रसिद्ध और अनोखा मेला रक्षा बंधन के दिन मनाया जाता है देवीधुरा बग्वाल मेला के बारे में आज हमने जाना अपना प्यार ऐसे ही बनाये रखे और माँ बाराही का आशीर्वाद सब भक्तो पर बने रही .

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