उत्तराखंड में कुमाऊँ का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य की शुरुआत कैसे हुई

छोलिया  कुमाऊँ के सबसे प्रसिद्ध नृत्यों में से एक माना जाता है। यह नृत्य कुमाऊँनी संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। इसका आयोजन मुख्यतः शादी विवाह आदि सुभ मांगलिक अवसरों पर किया जाता है।यह मुख्यतः पिथौरागढ़ के शोर क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इसके अलावा यह बागेश्वर अल्मोड़ा  में भी काफ़ी प्रसिद्ध है।

कुमाँऊनी  कहावते -भाग 2।Kumaoni Kahawat 

Kumaoni Famous Choliya dance
Kumaoni Famous Choliya Dance

छोलिया नृत्य की शुरुआत

शुरूआत:– इस नृत्य की शुरूआत खस राजाओं के समय हुई थी। जब विवाह तलवार की नोक पर किये जाते थे। इसके बाद जब कुमाऊँ में चंद राजाओं का आगमन हुआ तो इस नृत्य को क्षत्रियों की पहचान माना जाने लगा।

चूंकि यह नृत्य युद्ध की पृष्ठभूमि  और क्षत्रियों से संबंधित है इसलिए इसमें नृतक रंग बिरंगे कपड़े और चोला (जैसे कि चंद राजाओं के समय क्षत्रिय पहना करते थे ) पहनकर हाथ में तलवार और ढाल लेकर गजब के करतब दिखाते हैं और नृत्य करते हैं। जो कि देखने पर युद्ध के समान लगता है। इस नृत्य के साथ कोई भी गीत नहीं गाया जाता है ,जबकि यह ढोल दमाऊ की थाप और बीनबाजा रण सिंह जैसे वाद्य यंत्रों पर किया जाता है।Hamara youtube channel –PahadbKC ko Jarur Dekhe
रंगीलो पहाड़ फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए क्लिक करे –rangilopahad
रंगीलो पहाड़ व्हाट्सप्प ग्रुप जुड़ने के लिए क्लिक करे – rangilopahad
रंगीलो पहाड़ इंस्टाग्राम में जुड़ने के लिए क्लिक करे- rangilopahad

Leave a Reply

%d bloggers like this: