क्या आपको पता है कौन सा स्थान ‘भारत का स्विट्जरलैंड”कहलाता है आज जान ले

भारत का स्विट्जरलैंड कौसानी उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित  है जिसे भारत का स्विट्रजरलैंड कहा जाता है। यह बागेश्वर का खूबसूरत सा जगह माना जाता हे। धरती से उप्पर कुमाऊं का यह दृश्य कभी आस्चर्यजनक हे। चारो और से घिरा हुआ वातावरण खुला आसमान और सूर्योदय के समय चमकती हुई किरणे ,पक्षियों की गुनगुनाहट ,सुबह की चाय का स्वाद और सामने हिमालय के दर्शन कौसानी को अलग बनाती है। जी हा दोस्तों  कौसानी सपनो का शहर ही हे। भारत का स्विट्जरलैंड किसे कहा गया है ,उत्तराखंड में मिनी स्विट्ज़रलैंड कहाँ है? आप आपके सभी सवालो के जवाब आपको मिलेंगे हम सब का एक इच्छा होती है की छुट्टिओ में घूमने की कोई विदेश जाने की सोचता है जैसे Dubai ,स्विटजरलैंट ,सिंगापूर ,आदि और कही लेकिन आज में बात कर रहा हु। भारत के स्विट्जरलैंड की जो उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित है। छुट्टिया मनाने का इससे अच्छा द्रस्य और कही नहीं हो सकता है। जिस जगह की हम बात कर रहे है कौसानी

कौसानी के पर्यटन स्थल 

कौसानी होटल
                                                          कौसानी होटल
कौसानी के खुबसूरत स्थान
                                                   कौसानी के खुबसूरत स्थान

 

समुद्रतल से 1800 मीटर  उचाई के बिच चीड़ ,बाज के पेड़ो से घिरा यह क्षेत्र है। यहाँ पर रहने के लिया होटल और दुकाने भी है। इसके आलावा यहाँ पर्यटकों के लिए बहुत सारे आवास गृह भी है। लक्ष्मी आश्रम , उत्तराखंड टूरिस्ट लॉज , वन विभाग विश्राम,जिला परिषद,आवास ग्रह ,अनासक्ति आश्रम ,स्टेट बांग्ला ,मध्यम  उच्च स्तर के कई नए होटल है , जहा पर रात को ओढ़ने के लिए बढ़िया बिस्तर , कम्बल आदि मिल  जाते हे।  यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य देखने  को मिलता है।
सूत्रों के हिसाब से इसे कौशिकमुनि की तपोभूमि रही थी जिसके नाम से कौसानी पड़ा , वर्तमान काल में इसका कब्ज़ा अंग्रेजो के शासनकाल से 1884 चाय के बागान से हुआ। जो अब और भी अच्छा  गया  है।  पर्यटकों के लिए यह एक आकर्षण बना है।
कौसानी को यह उपलब्धि 1929 में मिली जब राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी जी यहाँ आये और 12 दिन रहे इसलिए उन्होंने यहाँ के अनुभव से इसे भारत का स्विट्जरलैंड कहकर इसका उल्लेख किया।

कौसानी हिमालय दर्शन 

कौसानी का मुख्य आकर्षण हिमालय का दर्शन है इसमें 340 km लम्बी बर्फ से ढकि  ऊचे उचे चोटिया का विशाल रूप दिखाई पड़ता है। सचमुच ऐसा द्रस्य न तो कश्मीर में हे न हि हिमांचल ,असम ,नेपाल में। जिन लोगो ने स्विट्जरलैंड को देखा हे उनका कहना है  उसी तरह यहाँ भी दिखने  मिलता है।
यहाँ से बड़े बड़े पर्वत शिखर देखने को मिलते हे जैसे- चौखम्बा , त्रिशूल ,नंदादेवी पर्वत ,पंचाचूली ,आदि हिमशिखर देखने को मिलते है।

कौसानी में सूर्योदय के समय काफी अच्छा चित्र देखने को मिलता हे। ऐसा लगता है पूरी दुनिया घूम के हिमालय के दर्शन हो गए है। यहाँ पर स्थित डाग बगला है जहा से ये और भी सुन्दर चित्र दिखाई देता हे।
कुसुमित घाटी
स्टेट बगले  के आसपास  चीड़ , बाज के पेड़ो से यह है। कौसानी कोशी और गोमती नमक दो नदियों के बिच की एक पहाड़ी है इस पहाड़ी में छोटे छोटे सीढ़ीदार खेत और सलती पत्थर और सुंदर मकानों से बना है

कौसानी साहित्यिक और विशेष स्मारक 

कौसानी लेखकों ,कवियों , कलाकारों ,प्रकति प्रेमियों और पर्यटकों की जन्मभूमि का स्थल है। इसके नाम से दो महान विभूतियों के नाम जुड़े है। जिनमे एक राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी है और दूसरे प्रकति के महान कवी सुमित्रा नंदन पंत जी।  गाँधी जी ने यहाँ आकर अनासक्ति योग नाम से गीता भूमिका लिखी ,इसी कारण वे १२ दिन तक यहाँ रहे उसका नाम अनाशक्ति आश्रम रखा। कौसानी धन्य है जिसने पंतजी जैसे महापुरुष को जन्म दिया है

कौसानी के लिए रास्ते 

हिमालय के समीप से दर्शन कराता भारत का स्विट्जरलैंड कौसानी  ,यहाँ सड़क मार्ग से पंहुचा जा सकता है।
इसके समीप रेलवे स्टेशन काठगोदाम और हवाई अड्डा पंतनगर यहाँ से  142 km  और 180 km   दूर है कौसानी जाने के बहुत सारे रास्ते है जैसे अल्मोड़ा से होकर जाता है ,दूसरा रानीखेत से जो दोनों सोमेश्वर में मिलते है, इसके अलावा ऋषिकेश से  ग्वालदम से होकर भी जाता है।
कौसानी देखने के लिए सबसे उपयुक्त समय मौसम अक्टूबर , नवंबर का है।

सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा-Culture City Almora

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