Badrinath Temple History और कैसे पड़ा नाम बद्रीनाथ

 badrinath temple histroy in hindi आज बताने जा रहे है char dham में से एक ऐसा धाम बाबा बद्रीनाथ मंदिर की कहानी और मान्यताये

badrinath temple image
Badrinath -The Hindu Temple of Uttarakhand ,India

बहुमी संति तीर्थानी दिव्य भूमि रसातले|
बद्री सदृश्य तीर्थं न भूतो न भविष्यती।।
अर्थात स्वर्ग,धरती,नरक,तीनों ही जगह अनेकों तीर्थ स्थान हैं लेकिन बद्रीनाथ जैसा तीर्थ ना ही कभी था और ना ही कभी भविष्य में होगा.
उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित यह मंदिर चार धामों में से एक है. भगवान विष्णु को समर्पित यह हिंदू मंदिर सर्वाधिक पवित्र स्थानों में गिना जाता है और काफ़ी प्राचीन है. यहां भगवान विष्णु के एक रूप बद्रीनारायण की पूजा की जाती है इसलिए इसे बद्रीनारायण भी कहा जाता है.यह मंदिर काफ़ी आकर्षक और विशाल है इसकी ऊँचाई करीब 15 मीटर है.

Kedarnath मंदिर का इतिहास का रहस्य:Kedarnath Yatra 2020 :

बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास |History of badrinath temple in hindi

ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा किया गया और शंकराचार्य जी ने ही भगवान विष्णु की मूर्ति यहां के नारदकुण्ड से निकालकर मंदिर में स्थापित की थी,जो कि भगवान विष्णु की एक विशाल प्रतिमा है जो कि शालीग्राम से निर्मित और करीब 1 मीटर ऊँची है. यह मूर्ति भगवान विष्णु की 8 स्वयं प्रकट हुई प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है.साथ ही कई श्रोतों के अनुसार यह पहले एक बौद्ध मठ था क्योंकि इस मंदिर की वास्तुकला तथा मुख का भाग किसी बौद्ध मंदिर ( विहार) के समान है. ऐसा कहा जाता है कि भगवान शंकराचार्य जी ने उस समय के परमाल राजा कनकपाल की सहायता से यहां स्थित बौद्धों को निष्कासित किया और यहां विष्णु मंदिर का निर्माण किया.
मंदिर का पुनर्निमाण :-यह मंदिर काफ़ी प्राचीन होने और इस क्षेत्र में समय समय पर होने वाले हिमस्खलन के कारण इसका कई बार नवीनीकरण किया गया है.गढ़वाल के शासकों द्वारा सत्रहवीं शताब्दी में इसका विस्तार किया गया था.1803 में यहां आए भूकंप से इसे काफ़ी क्षति पहुँची थी,जिसके बाद जयपुर के राजा द्वारा इसका पुनर्निमाण किया गया था.
बद्रीनाथ की पौराणिक कथाएँ

Badrinath ki  katha

यह माना जाता है कि यह स्थान पहले भगवान शिव और देवी पार्वती का था लेकिन एक बार जब भगवान विष्णु ध्यान योग्य स्थान की तलाश कर रहे थे तो उन्हें यह स्थान भा गया लेकिन यह भगवान शिव का निवास स्थल था जिस कारण भगवान विष्णु ने एक गरीब बालक का रूप लिया जब देवी पार्वती ने उस बालक को देखा तो उस पर उन्हें दया आ गई और उन्होंने बालक से पूछा “कि तुम अकेले यहां क्या कर रहे हो ”
तो उस बालक ने कहा कि “मैं एक अनाथ हूँ” इसके बाद वह रोने लगा.
इस पर देवी पार्वती ने उस बालक को अपने यहां शरण दे दी और उसके बाद देवी पार्वती और भगवान शिव घुमने चले गए. लेकिन जब वह वापस आए तो मंदिर का दरवाजा अंदर से बंद था. जिस पर भगवान शिव ने बालक से दरवाजा खोलने का आग्रह करने लगे लेकिन उस बालक ने दरवाजा नहीं खोला और कहा कि मैं सिर्फ एक शर्त पर दरवाजा खोलूँगा. पहले आप यह वचन दो कि आप इस स्थान को हमेशा के लिए छोड़कर चले जाओगे.अब भगवान शिव समझ गये कि यह बालक और कोई नहीं भगवान विष्णु हैं.और उन्होंने शर्त मान ली इसके बाद भगवान विष्णु अपने रूप में आ गये.इसके बाद भगवान शिव ने कहा यह स्थान आज से तुम्हारा है और इसे तुम्हारे ही नाम से जाना जाएगा.

कैसे पड़ा बद्रीनाथ नाम | kaise pada badrinath nam

वैसे तो यह कहा जाता है कि पहले इस जगह पर बेर जिनको बदरी भी कहा जाता है के जंगल थे. जिसका उल्लेख एडविन टी. एटकिंसन ने अपनी पुस्तक “the himalayan gajetiyar” में किया है. इसी कारण ऐसा माना जाता है कि इस जगह का नाम बद्रीनाथ पड़ा. इसके अलावा एक पौराणिक कहानी भी इसके पीछे बतायी जाती है.
badrinath ki manyta  जब भगवान विष्णु यहां ध्यान करने लगे तो उन्हें यहां काफ़ी वक्त हो गया था. जिस कारण देवी लक्ष्मी उन्हें ढूँढ़ते हुए इस जगह पर आयी उन्होंने देखा कि भगवान विष्णु ध्यान में लीन हैं और उनके ऊपर बर्फ पड़ रही है. उन्होंने बदरी ( बेड़) के पेड़ का रूप लिया और भगवान विष्णु के ऊपर आ गयी जिस कारण भगवान विष्णु के शरीर पर बर्फ पड़नी बंद हो गयी. जब भगवान विष्णु ध्यान से जागे तो उन्होंने बदरी के पेड़ के रूप में देवी लक्ष्मी को बर्फ से ढका हुआ देखा उसके बाद भगवान विष्णु ने कहा तुमने मेरा इस ध्यान में काफ़ी साथ दिया है और मेरे लिए बहुत त्याग किया है. आज से यह स्थान तुम्हारे यानी बदरी के पेड़ के नाम से ही जाना जाएगा. इसके बाद से इस जगह का नाम बद्रीनाथ पड़ गया. इसी कारण इसके आस पास के क्षेत्र को भी बद्रीनाथ के नाम से ही जाना जाता है

बद्रीनाथ में खास क्या है | badrinath me khas kya hai

बद्रीनाथ में पंच बदरी स्थित हैं जो कि काफ़ी प्रसिद्ध हैं. जिनके नाम इस प्रकार हैं-
1. बृद्ध बद्री
2. योग बद्री
3. ध्यान बद्री
4.आदि बद्री
5. भविष्य बद्री

badrinath temple unknown facts
बद्रीनाथ मंदिर अलकनंदा नदी से लगभग 50 मीटर ऊंचे भू भाग पर स्थित है. मंदिर में तीन संरचनाएँ हैं:-
1. गर्भ गृह
2. दर्शन मंडप
3. सभा मंडप
गर्भ गृह में भगवान विष्णु की शालीग्राम से बनी हुई 1 मीटर लंबी मूर्ति है. जिसमें भगवान के चार हाथ हैं दो हाथ ऊपर की ओर हैं जिनमें एक में शंख तथा दूसरे में चक्र है. जबकि दो हाथ योगमुद्रा में हैं. मूर्ति के ललाट पर एक हीरा भी जड़ा हुआ है. इसके अलावा यहां कुबेर,देवर्षि नारद,उद्धव तथा नर नारायण की मूर्तियाँ भी हैं. मंदिर के चारों और लक्ष्मी,नव दुर्गा आदि कई मूर्तियाँ स्थित हैं.

बद्रीनाथ का रास्ता  | How To Reach Badrinath temple of uttarakhand

badrinath temple kaise jaye गंगा द्वार (हरिद्वार ) से 384km व ऋषिकेश से 214km की दूरी पर चमोली जनपद में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है.समुद्र तल से इसकी औसत ऊँचाई 3133 मीटर है.यह नर और नारायण दो पर्वतों के मध्य में स्थित है. नर और नारायण अर्जुन और भगवान कृष्ण के पूर्व जन्म के रूप हैं.यहां आने के लिए कोटद्वार तथा ऋषिकेश मार्गों से बस व अन्य गाड़ियाँ जोशीमठ तक जाती हैं और जोशीमठ से 50km की दूरी तय करने पर बद्रीनाथ धाम पहुँचा जा सकता है.

Uttarakhand char dham yatra 2020:चार धाम यात्रा के लिए कैसे करे ऑनलाइन

badrinath temple history in hindi और badrinath temple opening date 2020 जुडी बाते आज हमने जाने है badrinath temple yatra आपको कैसी लगी यह कहानी और बाते कमेंट करके जरुर बताए धन्यवाद

रंगीलो पहाड़ फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए क्लिक करे –rangilopahad
रंगीलो पहाड़ व्हाट्सप्प ग्रुप जुड़ने के लिए क्लिक करे – rangilopahad
रंगीलो पहाड़ इंस्टाग्राम में जुड़ने के लिए क्लिक करे- rangilopahad

 

Leave a Reply

%d bloggers like this: