स्वामी विवेकानंद जयंती 2021 -जाने स्वामी विवेकानंद जी के बारे में 10 अनोखी बाते

about swami vivekananda in hindi में जानेंगे स्वामी विवेकानंद जयंती पर उनके बारे में विशेष जानकारी -अकेले एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने हमारे देश की संस्कृति और यहां के वेदांत का प्रचार प्रसार पूरे विश्व में किया था.इनके भाषण से ही दुनिया के लोग यहां के आध्यात्म और हिन्दू सनातन धर्म से रूबरू हुए थे.स्वामी विवेकानंद जी आज भी कई युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं.स्वामी विवेकानंद जी के विचार और उनके कहे हुए कथन आज भी हमें लक्ष्य पर डटे रहने और अपने जीवन को सफल बनाने की प्रेरणा देते हुए आए हैं.इसीलिए स्वामी विवेकानंद जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. Swami Vivekanada Hindi

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय (Biography of Swami Vivekananda in Hindi)

आज हम Swami Vivekanand ka Jivan Parichayस्वामी विवेकानंद जी का जन्म (Swami Vivekanand Ka Janm) 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता ( वर्तमान कोलकाता) में हुआ था.इनके पिता विश्वनाथ दत्त पेशे से एक वकील थे.जो कि उस समय कलकत्ता हाईकोर्ट के प्रसिद्ध वकीलों में गिने जाते थे.उनकी मां भुवनेश्वरी देवी एक गृहिणी थी जो कि एक आध्यात्मिक प्रवृति कि महिला थी.स्वामी विवेकानंद के जीवन पर उनकी मां की धारणा और उनकी आध्यात्मिक प्रवृति का गहरा असर पड़ा.स्वामी विवेकानंद जी के बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ था.ये बचपन से ही एक कुशाग्र बुद्धि के एक मेधावी छात्र थे.स्वामी विवेकानंद जी की मां एक धार्मिक प्रवृति की महिला थी जो एक शिव भक्त थी.वह रोज रामायण महाभारत वेद आदि ग्रंथों का पाठ करती थी.नरेन्द्र भी रोज अपनी मां के साथ बैठते और सुना करते थे.इसके बाद से ही  विवेकानंद जी की धार्मिक चीज़ों और आध्यात्म में रुचि बढ़ने लगी और वे धार्मिक मार्ग की ओर अग्रसर हुए.वह ईश्वर को जानने में काफी रुचि रखते थे. विवेकानंद जी के घर में समय समय पर पूजा प्रार्थना का आयोजन होते रहता था. उसमें कथावाचक और ज्योतिषी आए रहते थे.विवेकानंद जी काफी उत्सुकता के साथ उन्हें सुनते और तरह तरह के सवाल करते.कुछ सवाल तो उन कथावाचकों को भी चक्कर में डाल देते थे.इस तरह से स्वामी विवेकानंद जी का बचपन बीता .

स्वामी विवकानंद के गुरु कौन थे

रामकृष्ण परमहंस उनके गुरु थे -बढ़े होने पर उनकी आध्यात्म में रुचि और बढ़ने लगी उन्होंने कई किताबों और ग्रंथों का अध्ययन किया.इसी बीच स्वामी विवेकानंद जी की मुलाकात उनके गुरु राम कृष्ण परमहंस से हुई.उनके विचारों और भावनाओं से स्वामी विवेकानंद जी काफी प्रभावित हुए और उनके शिष्य बन गए.रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद जी की सारी शंकाएं पल भर में आसानी से दूर कर देते थे.स्वामी विवेकानंद जी भी रामकृष्ण परमहंस के सबसे प्रिय सदस्य थे.

स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण (Speech On Swami Vivekananda in Hindi)

शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद जी का प्रतिनिधित्व

स्वामी विवेकानंद जी ने 25 वर्ष की उम्र में पैदल ही भारत के कई जगहों कि यात्रा की इसके बाद वे अलग अलग देशों जैसे जापान के कई शहरों नागासाकी,क्योटो,याकोहमा, चीन तथा कनाडा होते हुए अमेरिका गए.स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका के शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया.कहा जाता है कि पहले  उन्हें शिकागो में  भाषण नहीं देने दिया गया था लेकिन एक अमेरिकी प्रोफेसर की मदद से उन्हें भाषण देने का मौका मिला.उन्होंने 11 सितंबर 18930को विश्व धर्म सम्मेलन शिकागो में अपना भाषण दिया. शुरुआत उन्होंने अमेरिकी भाइयो के बहनों के संबोधन से की और इसके बाद उनके विचारों और उनकी बातों से सारे अमेरिकी मंत्रमुग्ध हो गए.सम्मेलन में आए हुए वक्ता और बड़े बड़े विद्वान भी उनके विचारों से काफी प्रभावित हुए. वहां की मीडिया के उन्हें साइक्लोनिक हिन्दू नाम दिया.फिर स्वामी विवेकानंद जी ने लंदन पेरिस और भी कई जगहों पर अपना व्याख्यान दिया वे जहां भी जाते काफी लोग उनके भक्त बन जाते थे उन्हें सुनने के लिए लोगों की भीड़ खड़ी हो जाती थी.स्वामी विवेकानंद जी एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते थे जिसमें सभी धर्म समान हो और सभी मिल जुलकर रहें

स्वामी विवेकानंद के विचार

स्वामी विवेकानन्द जी ने कई बातें कही हैं जो कि आज भी प्रेरणा के श्रोत हैं

उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत

अर्थात-एक समय में एक ही काम करो उस काम में अपना पूरा शरीर और अपनी आत्मा डाल दो बस उसी के बारे में सोचो और सब कुछ भूल जाओ

पहले लोग हर अच्छी बात का मजाक बनाते हैं फिर विरोध करते हैं और फिर उसे स्वीकार कर लेते हैं

एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजार बार ठोकरें खाने के बाद ही होता है

स्वामी विवेकानंद के शिक्षा दर्शन सिद्धांत

स्वामी विवेकानन्द जी शिक्षा पर विशेष ध्यान देते थे.वे कहते थे कि शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान की तरह ही नहीं होनी चाहिए बल्कि शिक्षा ऐसी हो जिसे व्यवहार में भी लाया का सके.जीवन में उसका उपयोग किया का सके.उनके द्वारा शिक्षा के संदर्भ में दिए कुछ सिद्धांत हैं

शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे विद्यार्थी मानसिक ,शारीरिक और आत्मिक विकास हो सके

अर्थात -शिक्षा ऐसी हो कि बालक के मन,आत्मा और बुद्धि का विकास हो और एक अच्छे चरित्र का निर्माण हो सके और बालक अपने पर निर्भर हो जाए

बालक तथा बालिकाओं को समान शिक्षा मिलनी चाहिए

धार्मिक शिक्षा पुस्तकों द्वारा ना देकर आचरण तथा संस्कारों द्वारा दी जानी चाहिए

देश की आर्थिक प्रगति के लिए तकनीकी ज्ञान को बढ़ावा देना चाहिए

व्यक्ति को अपनी रुचि को महत्व देना चाहिए

स्वामी विवेकानंद जी संबंधित सवाल 

  • विवेकानंद का जन्म कहाँ हुआ था?
  • स्वामी विवेकानंद के बारे में आप क्या जानते हैं?
  • स्वामी विवेकानंद ने किसकी स्थापना की थी?
  • स्वामी विवेकानंद का पूरा नाम क्या था?
  • स्वामी विवेकानंद के समक्ष तीन प्रमुख कार्य कौन से 

स्वामी विवेकानंद के बारे ( About Swami Vivekananda In Hindi)

दोस्तों आज हमने जाना भारत के महान व्यक्ति about swami vivekananda in hindi  के बारे में जाना दोस्तों स्वामी विवेकानंद जयंती पर महापुरुष को शत शत नमन है .

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